निगम प्रमुख से अधिक कमाता है उसका ड्राइवर!

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Friday, November 08, 2013-12:06 PM

नई दिल्ली: म्यूनिसिपल कार्पोरेशन (बी.एम.सी.) के अधिकारियों द्वारा आधिकारिक वाहनों का अनियंत्रित इस्तेमाल इतना बढ़ गया है कि उनके ड्राइवरों के वेतन का बिल काफी अधिक बनने लगा है जिनमें से बहुत से ओवरटाइम करके और भी अधिक कमाई कर रहे हैं। निगम प्रमुख का ड्राइवर गत वित्तीय वर्ष में  11.9 लाख या 99,550 रुपए प्रतिमाह घर ले गया, जो खुद निगम प्रमुख के शुद्ध वेतन 90,000 रुपए से अधिक है। निगम ट्रांसपोर्ट विभाग से मिले आंकड़े दर्शाते हैं कि कार्पोरेशन ने वर्ष 2012-13 में अपने अधिकारियों के ड्राइवरों के भत्तों के रूप में लगभग 7 करोड़ रुपए खर्च किए। यद्यपि यह रकम निगम के 27,000 करोड़ रुपए के वार्षिक बजट के सामने मामूली है मगर यह सवाल उठाया जा रहा है कि कैसे बजट का 68 प्रतिशत एस्टैब्लिशमैंट कॉस्ट्स पर खर्च किया जा रहा है जैसे कि वेतन।

आंकड़ों से खुलासा हुआ है कि ओवरटाइम से 102 अधिकारियों में से अधिकतर के ड्राइवरों के वेतन काफी बढ़ रहे हैं। उदाहरण के लिए, डिप्टी म्यूनिसिपल कमिश्रर (जोन-1) के ड्राइवर ने 2012-13 में 11.3 लाख रुपए कमाए तथा डिप्टी म्यूनिसिपल कमिश्रर (शिक्षा) के ड्राइवर ने 10.9 लाख रुपए बनाए। अधिकारियों ने बताया कि बी.एम.सी. के ड्राइवरों का औसत वेतन 25,000-30,000 रुपए प्रति माह है। नियमों के अनुसार, कमिश्रर के ड्राइवर से प्रतिदिन 12 घंटे तथा अन्यों से 8 घंटे काम की आशा की जाती है। इससे अधिक लगने वाले किसी भी समय को ओवरटाइम माना जाता है जिसका भुगतान डी.ए, हाऊस रैंट अलाऊंस, ट्रांसपोर्ट अलाऊंस तथा अतिरिक्त लगाए गए घंटों  के लिए आंकी गए मूल वेतन से दोगुनी रकम के रूप में किया जाता है। यदि कोई ड्राइवर सार्वजनिक छुट्टी अथवा साप्ताहिक अवकाश के दिन काम करता है तो सारे दिन को ओवरटाइम के रूप में गिना जाएगा। ट्रांसपोर्ट विभाग के आंकड़ों की बात करें तो निगम के ड्राइवर प्रति माह औसत 250 अथवा लगभग 8 घंटे  प्रतिदिन अतिरिक्त लगाते हैं। इस पर टिप्पणी करने के लिए अतिरिक्त म्यूनिसिपल कमिश्रर मोहन अडवानी उपलब्ध नहीं हो सके जो ट्रांसपोर्ट विभाग के इंचार्ज हैं।

ओवरटाइम भुगतान कम करने के लिए ड्राइवरों को दो पालियों में लगाने का प्रस्ताव काफी लम्बे समय से बी.एम.सी. के विचाराधीन है मगर इस पर कभी कोई प्रगति नहीं हुई। एक अधिकारी ने स्वीकार किया कि यदि नगर निगम ड्यूटी के घंटों को शिफ्टों में बांट दे तो काफी धन बचाया जासकेगा। निगम सूत्रों ने बताया कि ट्रांसपोर्ट विभाग के आंकड़े केवल खुद अधिकारियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली कारों का ब्यौरा देते हैं, इनमें उनके परिवारों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले वाहनों को शामिल नहीं किया गया। ऐसी प्रत्येक कार के ड्राइवर के लिए नगर निगम एक बार फिर लगभग 30,000 रुपए प्रति माह खर्च करताहै।

सूत्रों ने बताया कि ओवरटाइम भुगतान ऊंचे होने का एक कारण यह है कि अधिकारी काफी देर रात को अपने ड्राइवरों को जाने देते हैं। चूंकि उस समय लोकल ट्रेनें नहीं चल रही होतीं, ड्राइवर कारों को निर्धारित गैरेज में छोडऩे की बजाय उन्हीं में सो जाते हैं। उन घंटों को भी ओवरटाइम में गिना जाता है। (टी.एन.एन.)अधिकारियों ने बताया कि बी.एम.सी. के ड्राइवरों का औसत वेतन 25,000-30,000 रुपए प्रति माह है। नियमों के अनुसार, कमिश्रर के ड्राइवर से प्रतिदिन 12 घंटे तथा अन्यों से 8 घंटे काम की आशा की जाती है। इससे अधिक लगने वाले किसी भी समय को ओवरटाइम माना जाता है जिसका भुगतान डी.ए., हाऊस रैंट अलाऊंस, ट्रांसपोर्ट अलाऊंस तथा अतिरिक्त लगाए गए घंटों  के लिए आंकी गए मूल वेतन से दोगुनी रकम के रूप में किया जाता है।


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