छत्तीसगढ़ चुनाव में कांग्रेस की उम्मीद सहानुभूति पर टिकी

  • छत्तीसगढ़ चुनाव में कांग्रेस की उम्मीद सहानुभूति पर टिकी
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Friday, November 08, 2013-1:37 PM

बस्तर (कुमार राकेश): गत मई में भीषण माओवादी हमले में छत्तीसगढ़ कांग्रेस का समूचा नेतृत्व खत्म हो गया था और पार्टी अब विधानसभा चुनावों में सहानुभूति के कारक पर उम्मीद लगाए बैठी है। क्या कांग्रेस की रणनीति सफल होगी, यह देखा जाना बाकी है, लेकिन राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि मुद्दे से पार्टी के अच्छी तरह नहीं निपटने के चलते हो सकता है कि वह जिस लाभ की उम्मीद लगाए बैठी है, वह धूमिल हो जाए।

समूचे आदिवासी क्षेत्र में कांग्रेस द्वारा लगाए गए पोस्टरों और होर्डिंगों पर कई स्थानीय चेहरों के अतिरिक्त पार्टी के तत्कालीन इकाई अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, वरिष्ठ नेताओं विद्याचरण शुक्ल और महेंद्र कर्मा के ‘‘बलिदान’’ की बात कही गई है और इसे भुनाने के लिए उसने कई निर्वाचन क्षेत्रों में उनके परिजनों को चुनाव मैदान में उतारा है। हालांकि, क्षेत्र में इस मुद्दे ने मतदाताओं का ज्यादा ध्यान आकृष्ट नहीं किया है।

पार्टी नेताओं का कहना है, ‘‘नेताओं की रक्षा में विफल रहने के लिए भाजपा सरकार को निशाना बनाने की बजाय हमारे नेता कई नेताओं की अचानक हुई मौत से खाली हुई जगहों को भरने के लिए झगड़ते रहे जिससे रमन सिंह सरकार को आरोप को नाकाम करने और ‘विकास’ की अपनी थीम के साथ राजनीतिक एजेंडा तय करने के लिए पर्याप्त समय मिल गया।’’

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अजित जोगी नेताओं के आरोप-प्रत्यारोप में शामिल रहने की वजह से ‘‘सहानुभूति कारक’’ का निर्माण करने मे अपनी पार्टी की विफलता को लेकर खुलेआम बोल चुके हैं।


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