राहुल में देश की उम्मीदों पर खरे उतरे की क्षमता नहीं: जेटली

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Friday, November 08, 2013-4:19 PM

रायपुर: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरूण जेटली ने कहा है कि स्पष्टवादी विचारों से कोसों दूर और लगातार प्रश्न खड़े कर रहे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी में देश की उम्मीदों पर खरा उतरने की क्षमता नहीं है।

छत्तीसगढ़ के चुनावी दौरे पर आए जेटली ने आज यहां पत्रकारों से कहा कि स्वयं कांग्रेस ने दिशाहीन नेतृत्व से पिंड छुड़ाने का मन बना लिया है। वह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के विकल्प के रूप में गांधी को लाना चाहता है जिनकी न तो कोई स्पष्ट सोच है और न ही उनसे देश की समस्याओं के हल की उम्मीद ही की जा सकती है।
 
उन्होंने कहा कि भाजपा ने एक तरफ देश के सामने एक समक्ष एवं निर्णायक नेतृत्व प्रस्तुत किया है दूसरी तरफ कांग्रेस जिसे विकल्प बनाना चाहती है वह केवल प्रश्न ही खड़े कर रहे हैं। उनके उत्तर उनके पास नहीं है। जेटली ने कहा कि भ्रष्टाचार से घिरी मनमोहन सरकार के खिलाफ देश भर में माहौल है जिसका लाभ भाजपा को पांच राज्यों में हो रहे चुनावों में भी मिल रहा है।

उन्होंने दावा किया कि पांच में जिन चार राज्यों में भाजपा की पैठ है वहां से पार्टी के पक्ष में सकारात्मक रिपोर्ट आ रही हैं। भाजपा के इन सभी राज्यों में सरकार बनने के पूरे आसार है। उन्होंने कहा कि इन राज्यों में कांग्रेस बचाव की मुद्रा में है। यह चुनाव अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनावों के मतदाताओं के रूख को स्पष्ट कर देंगे।

जेटली ने छत्तीसगढ़ का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में 10 वर्षो में चौमुखी विकास हुआ है। मुख्यमंत्री रमन सिंह की स्वीकार्यता
एवं लोकप्रियता बहुत अधिक है। भाजपा को मुख्यमंत्री की छवि तथा बेहतर कामकाज के कारण तीसरी बार सरकार बनाने का मौका जरूर मिलेगा।

उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राज्य में गरीबी बढऩे के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राज्य में 10 वर्षो में गरीबी में कमी आई है। छत्तीसगढ़ ने इसके साथ ही माओवाद से लड़ाई में भी देश को एक नई दिशा दिखाई है। कांग्रेस के एक वर्ग की माओवादियों से सांठगांठ की सूचनाएं उनकी विश्वसनीयता को संदेहात्मक बनाती है।

उन्होने झीरम घाटी नक्सली हमले, झलियामारी बालिका छात्रावास में सामूहिक दुराचार, इंदिरा बैंक घोटाले जैसे प्रकरणों के बारे में पूछे जाने पर कहा कि इस तरह की चुनौतियों के आगे भी आने से इनकार नहीं किया जा सकता पर इसमें रमन सरकार का रवैया और उसके द्वारा उठाए गए कदमों पर भी ध्यान देना होगा।


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