श्रीलंका में चोगम सम्मेलन में भाग नहीं लेंगे प्रधानमंत्री!

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Saturday, November 09, 2013-1:50 PM

नई दिल्ली: कांग्रेस कोर ग्रुप की हुई बैठक में इस बात पर विचार किया गया कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को राष्ट्रकुल शासनाध्यक्षों की बैठक (चोगम) में भाग लेने के लिए श्रीलंका जाना चाहिए या नहीं। बैठक में क्या फैसला हुआ इस बारे में आधिकारिक रूप से कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रधानमंत्री भी मौजूद थे।

उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व विदेशमंत्री सलमान खुर्शीद कर सकते हैं। पार्टी सूत्रों ने बताया कि शुक्रवार सुबह प्रधानमंत्री के आवास पर कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की बैठक में यह राय सामने आई कि इस समय मनमोहन सिंह का श्रीलंका जाना 'कठिन' होगा। सूत्रों ने बताया कि बैठक में इस बात का संज्ञान लिया गया कि तमिलनाडु के सभी राजनीतिक दल प्रधानमंत्री की प्रस्तावित श्रीलंका यात्रा के खिलाफ हैं और वहां की विधानसभा में राष्ट्रमंडल सम्मेलन में भारत के भाग लेने के खिलाफ आम सहमति से प्रस्ताव पारित किया गया है।

प्रधानमंत्री आवास पर कांग्रेस कोर ग्रुप की बैठक की अध्यक्षता पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने की। बैठक में वरिष्ठ मंत्री एके एंटनी, पी चिदंबरम, सुशील कुमार शिंदे और सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल ने हिस्सा लिया। सूत्रों के मुताबिक अंतिम फैसला नहीं किया गया है और सरकार को अपना रुख स्पष्ट करने में एक-दो दिन लग सकते हैं।

सूत्रों ने बताया कि औपचारिक निर्णय जल्दी ही लिया जाएगा और उसकी घोषणा की जाएगी। तमिलनाडु के राजनीतिक दलों एवं अन्य संगठनों ने चोगम बैठक में किसी भी स्तर पर भारत की भागेदारी का विरोध किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि श्रीलंका सरकार ने गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन किया है और उनकी जातीय तमिलों को अधिकार सौंपने की कोई योजना नहीं है।

सूत्रों के अनुसार बैठक में इस मुद्दे के सभी पहलुओं पर विस्तार से विचार किया गया। उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु के लगभग सभी राजनीतिक दल प्रधानमंत्री के श्रीलंका जाने के खिलाफ हैं। राज्य विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित कर केन्द्र से यह अनुरोध भी किया है कि भारत को इस बैठक का बहिष्कार करना चाहिए, इन दलों का कहना है कि श्रीलंका की सेना ने लिट्टे के खिलाफ गृहयुद्ध के दौरान निर्दोष तमिलों पर भारी अत्याचार किये और मानवाधिकारों का उल्लंघन किया और इसके लिए श्रीलंका सरकार दोषी है।


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