आई.सी.यू. में भी मौत का घोटाला

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Saturday, November 09, 2013-6:18 PM

नई दिल्ली (निहाल सिंह) : दिल्ली के सरकारी अस्पतालों के गहन चिकित्सा कक्ष (आई.सी.यू.) में भी अब मौत के घोटाले शुरू  हो गए हैं। राजधानी के एक बड़े सरकारी अस्पताल के आई.सी.यू. में एक ही समय सीमा में हुई मौत के अलग-अलग आंकड़े अस्पताल प्रशासन ने आर.टी.आई. में दिए हैं।

सबसे पहले एक आर.टी.आई. के जवाब में अस्पताल की ओर 75 फीसदी मौत होने की जानकारी दी गयी, लेकिन जब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एन.एच.आर.सी.) ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए अस्पताल से जवाब मांगा तो अस्पताल ने 75 की जगह सिर्फ 40 फीसदी मौत होने की बात कही। इससे साफ है कि अस्पताल मौत के सही आंकड़े को छुपाने की कोशिश कर रहा है। 

क्या था मामला : पूर्वी दिल्ली के कड़कडड़ूमा स्थित हेडगेवार आरोग्य संस्थान में आर.टी.आई कार्यकर्ता नरेन्द्र शर्मा ने अस्पताल के आई.सी.यू. में भर्ती होने वाले और मरने वाले रोगियों से संबधित सवाल सूचना के अधिकार के तहत पूछे थे जिसके जवाब में अस्पताल प्रशासन ने जानकारी दी कि 7 अप्रैल 2011 से 27 सितम्बर 2012 तक आई.सी.यू. में कुल 145 मरीज भर्ती हुए जिसमें से 107 लोगों की मृत्यु हो गई थी। आर.टी.आई. कार्यकर्ता  को जब अस्पताल के आई.सी.यू. में 75 फीसदी  मौतों की जानकारी लगी तो उन्होंने इसकी शिकायत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को कर दी। दूसरी ओर जब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अस्पताल से इस मामले पर तलब किया तो अस्पताल प्रशासन ने मामले को गुमराह करने के लिए आर.टी.आई. में पूछी गई समय सीमा में होने वाली मौतों की संख्या न बताकर पूरे 2 वर्ष का आंकड़ा  बता दिया। अस्पताल को कहना है कि केवल 40 फीसदी मौत ही आई.सी.यू. में हुई है।

पूर्व आई.सी.यू. हैड ने किया था बिना सुविधाओं के आई.सी.यू चालू करने का विरोध :  आई.सी.यू. में हो रही मौतों के पीछे आर.टी.आई. कार्यकर्ता का आरोप है कि अस्पताल में प्रर्याप्त संशाधन और स्टाफ की कमी के कारण इतनी मौतें हो रही हैं जिसका प्रमाण अस्पताल की पूर्व आई.सी.यू. हैड डॉ. वंदना सेठ ने का वो पत्र है जिस उन्होंने बिना सुविधाओं के आई.सी.यू. चालू करने का विरोध किया था। 

डॉ वंदना सेठ ने 28 सितम्बर 2010 को अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति दर्ज करवाई थी। नरेन्द्र शर्मा का कहना है चिकित्सा अध्यक्ष ने किसी अप्रत्यक्ष लाभ के कारण आई.सी.यू. को विरोध के बावजूद चालू किया, जिससे सैंकड़ों लोगों को जान से हाथ धोना पड़ गया। 

गलत जानकारी से गुमराह कर रहा है प्रशासन: आर.टी.आई. कार्यकर्ता नरेन्द्र शर्मा का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन गलत जानकारी देकर लोगों को और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को गुमराह कर रहा है। शर्मा का कहना है कि गलत जानकारी देने के लिए अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक के ऊपर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। 

Edited by:Jeta

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