मप्र में राहुल फार्मूले को झटका, सांसद पुत्र भी मैदान में

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Sunday, November 10, 2013-9:46 AM

भोपाल: मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारी तय होने से लेकर नामांकन भरे जाने तक कांग्रेस में वह सब कुछ हुआ है जो पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी नहीं चाहते थे। राज्य के नेताओं ने राहुल फार्मूले को भी झटका देने में हिचक नहीं दिखाई है। इसका बड़ा प्रमाण रतलाम से कांग्रेस सांसद प्रेम चंद्र गुड्डू के बेटे अजीत बोरासी का नाटकीय ढंग से कांग्रेस का उम्मीदवार बनना है। राज्य के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए जीत हासिल करना किसी चुनौती से कम नहीं है, क्योंकि यहां के हालातों की खबर हाईकमान तक को है।

 

यही कारण है कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने से पहले पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अघोषित फार्मूला बनाया और इससे नेताओं को अवगत भी कराया। इसमें मुख्य तौर पर गुटबाजी खत्म करना, दल बदलुओं को टिकट न देना और सांसद पुत्रों को चुनाव न लड़ाना प्रमुख था, मगर राज्य के नेता कहां मानने वाले थे। तभी तो फार्मूले के तीनों प्रमुख कारक एक-एक कर धराशायी हो गए।

 

राहुल ने सबसे पहले एकजुटता पर ध्यान दिया और चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने के पहले नेताओं को एकजुट रहने की न केवल नसीहत दी बल्कि इसे जाहिर करने के लिए एक मंच पर आने को मजबूर कर दिया। गांधी की कोशिशों का ही नतीजा रहा है कि क्षत्रप केंद्रीय मंत्री कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया, राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह, प्रदेशाध्यक्ष कांतिलाल भूरिया नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी न चाहते हुए भी एकमंच पर आए और एकता की कसमें भी खाई। मगर यह ज्यादा दिन तक नहीं चला।

 

पार्टी के अंदरखाने की खबरों के मुताबिक गांधी ने सांसदों के बेटों को किसी भी सूरत में उम्मीदवार न बनाए जाने का फरमान जारी किया। यही कारण रहा कि चाहकर भी सांसद सज्जन वर्मा, सत्यव्रत चतुर्वेदी और प्रेमचंद्र गुड्डू अधिकृत तौर पर उम्मीदवारों की सूची में अपने बेटों का नाम नहीं जुड़वा पाए। प्रदेशाध्यक्ष भूरिया तो राहुल गांधी के फार्मूले के आधार पर बेटे को टिकट दिलाने के मामले में पीछे हट गए थे। बाद में गुड्डू ने अपने बेटे अजीत बोरासी को आलोट विधानसभा क्षेत्र से डमी उम्मीदवार के तौर पर नामांकन भरवा दिया।

 

कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय में उम्मीदवारों को बी फार्म उपलब्ध कराने वाले प्रदेश उपाध्यक्ष राजीव सिंह ने संवाददाताओं के सामने स्वीकार किया कि उन्होंने आलोट विधानसभा क्षेत्र के लिए बी फार्म में सिर्फ कमल परमार का नाम लिखा था और स्थापन (डमी) के स्थान पर कलम से चिन्ह (मार्क) किया गया था। उन्होंने आगे कहा कि वे नहीं जानते कि अजीत का नाम कैसे आ गया। वहीं पार्टी के उपाध्यक्ष रामेश्वर नीखरा का कहना है कि बोरासी का नामांकन मंजूर हो गया है और इस मसले को खत्म कर देना चाहिए।

 

रतलाम के निर्वाचन अधिकारी अवधेष शर्मा के मुताबिक कमल परमार का नामांकन दस्तावेजों की कमी के चलते निरस्त कर दिया गया है और अजीत बोरासी को कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवार के तौर पर मान्यता दी गई है। राहुल गांधी के निर्देश के बावजूद सांसद पुत्र के चुनाव मैदान में होने के घटनाक्रम को पार्टी के पदाधिकारी गंभीर मान रहे हैं। एक पदाधिकारी का कहना है कि यह अनुशासनहीनता है और संबंधित व्यक्ति पर कार्रवाई होनी चाहिए, मगर चुनाव के बाद, क्योंकि कार्रवाई किए जाने से चुनावी माहौल पर असर पड़ेगा।


पाला बदलने वाले भी पा गए टिकट
एक तरफ  राहुल गांधी के फार्मूले के विरुद्घ सांसद पुत्र चुनाव में मैदान में है तो दूसरी ओर वे लोग भी टिकट पा गए हैं, जिन्होंने कुछ दिन पहले ही पाला बदल किया था। ऐसे लोगों में सिलवानी से देवेंद्र पटेल, जतारा से दिनेश अहिरवार, खरगापुर से चंदा देवी गौर प्रमुख हैं। ठीक इसके विपरीत वे लोग टिकट नहीं पा सके है जो वर्षों से पार्टी के लिए काम करते आए हैं।

 

उनमें भोपाल के पी.सी. शर्मा, देवरी से रामजी दुबे, सिलवानी से जसवंत सिंह, सागर से स्वदेश जैन, पवई से पूर्व मंत्री राज पटैरिया शामिल हैं। इस सब खेल के पीछे पार्टी की गुटबाजी मानी जा रही है। विधानसभा चुनाव में टूटे राहुल गांधी के फार्मूले ने यह साबित कर दिया है कि राज्य के नेता जो चाहते हैं वह करके ही मानते हैं। यह स्थिति आने वाले समय में कांग्रेस के लिए ज्यादा हानिकारक हो इसमें किसी को संदेह नहीं होना चाहिए।


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