‘राखी के बंधन को भुला बैठीं मायावती’

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Sunday, November 10, 2013-11:13 AM

लखनऊ: समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राजेन्द्र चैधरी ने बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि वह अपनी प्रेसवार्ता में पुराने पन्ने पढऩे की आदी हो गई हैं। प्रवक्ता ने कहा कि आश्चर्य है कि सतीश मिश्र जैसे वकील के रहते उन्हें यह ज्ञान नहीं मिला कि राष्ट्रपति शासन कुछ संवैधानिक शर्तों को पूरा करने पर ही लगता है। बसपा मुखिया तो समाजवादी पार्टी सरकार के शपथ ग्रहण की तारीख से ही राष्ट्रपति शासन की मांग करने लगी हैं और इसके लिए वह जो कारण बताती हंै, वे उनके राज के ही नमूने हंै।  सपा पर भाजपा से मिलीभगत का आरोप लगाते समय मायावती अपने राखी के बंधन को भूल गईं कि भाजपा के ही चलते वे तीन बार मुख्यमंत्री बन सकीं।

प्रवक्ता ने कहा कि उत्तर प्रदेश में आज समाजवादी पार्टी सरकार में नए उद्योग धंधे लग रहे हैं। 27000 करोड़ रुपये से ज्यादा का अब तक पूंजीनिवेश हो चुका है। प्रवक्ता ने मायावती पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस बसपा कुशासन में 17 पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति का लाभ छीना गया था उसे फिर देने के लिए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की कोशिशों का वे विरोध कर रही हैं।

जाहिर है, वे न पिछड़ों का भला चाहती है और नहीं अनुसूचित जाति का। वे दलितों की भावनाओं का शोषण कर सिर्फ अपनी तिजोरी भरने का काम करती हैं। प्रवक्ता ने कहा कि हीरे-जवाहरातों की शौकीन मायावती पता नहीं किस दलित का प्रतिनिधित्व करती हैं क्योंकि आज तक तो किसी दलित के घर में उसके सुख दु:ख में शरीक होने तो वे गई नहीं। वे तो महलों और पंचसितारा में जिन्दगी जीने की आदी हो गई हैं।


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