आकर्षक शीर्षकों के साथ आयोजित हो रही हैं बिहार में रैलियां

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Sunday, November 10, 2013-3:55 PM

पटना: बिहार की राजनीति का अहम हिस्सा मानी जाने वाली रैलियों के लिए राजनीतिक दलों ने अब ‘खबरदार’, ‘हुंकार’ और ‘अधिकार’ जैसे आकर्षक शीर्षक रखने शुरू कर दिए हैं ताकि लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा जा सके। पिछले महीने कई ऐसी रैलियां हुर्इं। भाकपा (माले) ने पटना में 30 अक्तूबर को ‘खबरदार रैली’ आयोजित की थी। इस रैली का आयोजन खास तौर पर 16 वर्ष पहले जेहानाबाद जिले के एक गांव में 58 दलितों की हत्या के मामले में सभी 26 आरोपियों को हाल में पटना उच्च न्यायालय द्वारा बरी किए जाने के विरोध में किया गया था। इस रैली के लिए भाकपा (माल)े का नारा था, ‘सामंती-साम्प्रदायिक ताकतों, खबरदार, लुटेरी फासीवादी ताकतों खबरदार, बिहार की जनता आती है।’ 

इससे पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 27 अक्तूबर को पटना में ‘हुंकार रैली’ आयोजित की थी जिसे उसके स्टार प्रचारक और पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने संबोधित किया था। मोदी की रैली में हिस्सा लेने का लोगों से आग्रह करने के लिए राज्य भर में लगाए गए भाजपा के पोस्टरों से साफ झलक रहा था कि भाजपा के साथ संबंध तोडऩे वाले नीतिश कुमार रैली में निशाने पर होंगे। एक पोस्टर में लिखा था, ‘गठबंधन का तिरस्कार, हुंकार उठा बिहार’। एक अन्य पोस्टर में लिखा था, ‘विश्वासघात को धिक्कार, हुंकारेगा बिहार।’ भाकपा ने 25 अक्तूबर को गांधी मैदान में ‘जनाक्रोश रैली’ आयोजित की थी जिसमें बढती महंगाई, कांग्रेस और भाजपा की गरीब विरोधी नीति तथा साम्प्रदायिक हिंसा के बढते मामलों को उठाया गया था। इससे पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य को विशेष दर्जा दिलाने की मांग को दिल्ली ले जाने के लिए ‘अधिकार रैली’ आयोजित की थी।
 


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