महिलाओं को लुभाना नहीं होगा आसान

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Sunday, November 10, 2013-4:39 PM

नई दिल्ली: दिल्ली में 4 दिसम्बर को होने वाले विधानसभा चुनावों में जब 3 राजनीतिक दल सत्तारूढ़ कांग्रेस, भाजपा और आप अपना अपना भाग्य आजमाने उतरेंगे तो उनके लिए यहां करीब 51 लाख महिला मतदाताओं को लुभा पाना आसान नहीं होगा, जिन्हें लगता है कि उनकी सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा है।

सरकार का दावा है कि उसने महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे को हमेशा अपनी प्राथमिकता सूची में शामिल किया है लेकिन विशेषज्ञों और कार्यकर्ताओं को लगता है कि 16 दिसम्बर को सामूहिक बलात्कार की घटना के बाद कुछ संस्थागत कदम उठाए जाने के बावजूद इस मोर्चे पर कोई खास सफलता हासिल नहीं की गई है।

गैर सरकारी संगठन जागोरी की निदेशक कल्पना विश्वनाथन ने कहा, बिजली, पानी और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मद्दे ज्वलंत विषय हैं लेकिन महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा इस बार चुनावों के एजेंडे में सबसे उपर होगा और पहले की तरह इस बार राजनीतिक दल महिला मतदाताओं को नजरअंदाज करने का जोखिम नहीं उठा सकते।

हालांकि मुख्यमंत्री शीला दीक्षित आगामी विधानसभा चुनावों में लगातार चौथी जीत का विश्वास जता रही हैं लेकिन सामाजिक अनुसंधान केंद्र की निदेशक रंजना कुमारी का कहना है कि सत्तारूढ़ दल को महिलाओं के खिलाफ हिंसा के बढ़ते मामलों के कारण इस बार उनके गुस्से का शिकार होना पड़ेगा।

महिला मतदाताओं का समर्थन हासिल करने के लिए अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने पहले ही ‘महिला सुरक्षा बल’ नाम से प्रत्येक कॉलेज और विधानसभा क्षेत्र में मुहिम शुरू की है। भारतीय जनता पार्टी भी अपने घोषणा-पत्र में महिलाओं की सुरक्षा बढ़ाने के लिए उठाए जाने वाले कदमों की एक शृंखला की घोषणा कर सकती है।

दिल्ली विश्वविद्यालय की एक छात्रा रितिका ने कहा कि मौजूदा सरकार ने सामूहिक बलात्कार की घटना के बाद कई वादे किए थे लेकिन कुछ खास बदलाव नहीं आया है। दिल्ली चुनाव आयोग के अनुसार इस बार कुल 1.15 करोड़ मतदाताओं में से  63,81,003 पुरुष और 51,29,490 महिलाएं हैं।


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