जांच एजेंसियां फैसला करने के बारीक भेदों को समझें :सिब्बल

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Monday, November 11, 2013-8:06 PM

नई दिल्ली: विधि मंत्री कपिल सिब्बल ने आज कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के आवंटन में निजी और सार्वजनिक बेहतरी के बीच संतुलन होना चाहिए। इस बारे में फैसला करते समय कुछ हद तक विशेषाधिकार का भी उपयोग हो सकता है और साथ ही नीतियों के कार्यान्वयन में गड़बडिय़ों की भी गुंजाइश रह सकती है।

सीबीआई द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए सिब्बल ने कहा कि सरकार देश के प्राकृतिक संसाधनों का संप्रभु संरक्षक है और मूल्य और आर्थिक संपत्ति पैदा करने के लिए इन प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल जरूरी है। उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा करने में सरकार को सुनिश्चित करना है कि प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल व्यापक जनहित और पारिस्थितिकी और पर्यावरण की रक्षा करने के दोहरे उद्देश्यों के अनुरूप हो।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए ऐसा कहना आसान है लेकिन करना मुश्किल क्योंकि ज्यादातर प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल करने के लिए नवीनतम प्रौद्योगिकी पर बड़े-बड़े बहुराष्ट्रीय निगमों का एकाधिकार है।’’ विधि मंत्री ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के इस्तेमाल के लिए नीतियां तैयार करते वक्त सरकार को निजी और सार्वजनिक बेहतरी के बीच संतुलन बनाना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए इस बारे में फैसला करते समय कुछ हद तक विशेषाधिकार का भी उपयोग हो सकता है और साथ ही नीतियों के कार्यान्वयन में गड़बडिय़ों की भी गुंजाइश रह सकती है। इसलिए भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसियों को नीतियों को लागू करने और फैसला करने के बारीक भेद की बेहतर समझ बनाने की आवश्यकता है।’’


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