दिल्ली गैंगरेप: दोषियों ने कहा, राष्ट्रपिता भी थे मृत्युदंड के खिलाफ

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Tuesday, November 12, 2013-10:00 AM

नई दिल्ली: महात्मा गांधी के कथन का इस्तेमाल करते हुए राष्ट्रीय राजधानी में गत वर्ष 16 दिसंबर को 23 वर्षीय एक पैरामेडिकल छात्रा से गैंगरेप और उसकी हत्या के मामले में मौत की सजा का सामना कर रहे दो दोषियों ने निचली अदालत की ओर से सुनाई गई सजा को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती देते हुए कहा कि यहां तक कि राष्ट्रपिता भी मृत्युदंड की सजा के खिलाफ थे। दोषियों विनय शर्मा और अक्षय ठाकुर की तरफ से दलील देते हुए अधिवक्ता ए पी सिंह ने न्यायमूर्ति रेवा खेत्रपाल और प्रतिभा रानी की पीठ के समक्ष कहा, ‘‘मौत की सजा समाज में अपराध को नहीं रोकेगी और इस मामले में दोनों इस सजा के हकदार नहीं हैं।’’

 

सिंह ने गांधी के इस कथन को उद्धृत किया जिसमें उन्होंने कहा था, ‘‘मेरा जमीर इस बात से सहमत नहीं है कि किसी को भी फांसी दी जानी चाहिए। सिर्फ ईश्वर ही जीवन ले सकता है क्योंकि सिर्फ वही इसे दे सकता है।’’ सिंह ने दलील दी कि मृत्युदंड अपराध को रोकने का समाधान नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘मृत्युदंड अपराधी को मार डालेगा लेकिन समाज में अपराध को नहीं रोकेगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मौत की सजा मानवाधिकारों से वंचित करना है।’’

 

निचली अदालत की ओर से मुकेश, पवन कुमार गुप्ता, विनय और अक्षय की मौत की सजा की पुष्टि के लिए भेजे गए रेफरेंस के साथ-साथ निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दोषियों की अपील पर उच्च न्यायालय रोजाना सुनवाई कर रहा है। पिछले साल 16 दिसंबर को राम सिंह (मृत) और एक किशोर के साथ इन चार दोषियों ने 23 वर्षीय लड़की से चलती बस में सामूहिक बलात्कार किया था और उसपर बर्बर हमला किया था।

 

लड़की की गत 29 दिसंबर को सिंगापुर के अस्पताल में मृत्यु हो गई थी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश योगेश खन्ना ने चारों को सामूहिक बलात्कार और असहाय लड़की की नृशंस हत्या का दोषी ठहराया था।


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