‘शिक्षा अधिकार कानून’ का पालन करें सियासी दल

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Tuesday, November 12, 2013-3:59 PM

नई दिल्ली: राजधानी में चुनाव की सरगर्मियां तेज होने के बीच ‘दिल्ली राइट टु एजुकेशन फोरम’ ने चुनावी मैदान में खम भरने वाले तमाम राजनीतिक दलों से अपने-अपने चुनावी घोषणा-पत्र में ‘शिक्षा के अधिकार कानून’ के शब्दश: क्रियान्वयन को शामिल करने की अपील की है।

दिल्ली राइट टु एजुकेशन फोरम ने बच्चों के लिए सामाजिक समावेश के साथ समतामूलक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को अनिवार्य बनाने और शिक्षा के अधिकार कानून के प्रति जागरूगता फैलाने के लिए आज से राजधानी में ‘शिक्षा के लिए वोट अभियान’ की शुरूआत की।

राइट टु एजुकेशन फोरम में राज्य के करीब 100 गैर सरकारी नागरिक एवं सामाजिक संगठन शामिल हैं। दिल्ली राइट टु एजुकेशन फोरम की संयोजक एनी नमाला ने कहा कि हम मानते हैं कि शिक्षा अपने आप में एक अधिकार है और अन्य तमाम अधिकारों को प्राप्त करने का साधन है। हम तमान राजनीतिक दलों से अपने चुनावी एजेंडे में गुणवत्तापूर्ण सार्वजनिक शिक्षा को प्राथमिकता के आधार पर शामिल किये जाने की मांग करते हैं।

शिक्षा के लिए वोट अभियान तहत फोरम में शामिल संगठन सदस्य राज्य के करीब 100 स्थानों का सर्वेक्षण करके ‘शिक्षा के लिए वोट अभियान के तहत ’ एक लाख से अधिक ‘जनमत’ एकत्रित करेेंगे। यह अभियान 25 नवंबर तक चलेगा।

जनमत संग्रह के आधार पर फोरम सरकार को अपना मांग पत्र सौंपेगा। फोरम के छह सूत्रीय मांग-पत्र में शिक्षा के अधिकार को समुचित रूप से लागू करने के अलावा बच्चों का भेदभाव रहित समावेशीकरण, समतामूलक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, राज्यों द्वारा सार्वजनिक स्कूली शिक्षा का निजीकरण का विरोध होगा।


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