छत्तीसगढ़ में चावल को लेकर राजनीति

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Wednesday, November 13, 2013-3:21 PM

पेन्ड्रा/बिल्हा (छत्तीसगढ़): मध्य भारत का धान का कटोरा कहलाने वाले छत्तीसगढ़ में अनाज को लेकर राजनीति हो रही है। राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी कांग्रेस अनाज के जरिये मतदाताओं को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही कहा है कि अगर इस राज्य में उनकी सरकार बनती है तो वह लोगों के एक चयनित समूह को न्यूनतम दर पर चावल मुहैया कराएंगे।

 

अपने घोषणापत्र में कांग्रेस ने कहा है कि अगर राज्य में उसकी सरकार बनेगी तो वह गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले (बीपीएल) लोगों को गरीबी रेखा से उपर जीवन यापन करने वालों (आयकर दाताओं को छोड़ कर) 35 किग्रा चावल मुफ्त मुहैया कराएगी।

 

दूसरी ओर सत्तारूढ़ भाजपा को अपनी कथित पारदर्शी सार्वजनिक वितरण प्रणाली और अन्त्योदय (अत्यंत निर्धन) तथा बीपीएल श्रेणी के लोगों को किफायती दर पर चावल मुहैया कराने की योजना पर भरोसा है। छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार अन्त्योदय और बीपीएल श्रेणी के लोगों को पहले ही क्रमश: एक रूपये और दो रूपये प्रति किलो की दर से चावल मुहैया करा रही है।

 

पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में गरीबों को एक रूपये प्रति किलो की दर से चावल देने का वादा किया है। राज्य के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी कहते हैं ‘‘चावल यहां हमेशा से ही राजनीति का विषय रहा है। अगर हम सत्ता पर आए तो अन्त्योदय, बीपीएल और एपीएल श्रेणी के लोगों को 35 किग्रा चावल हर माह मुफ्त मुहैया कराया जाएगा।’’ अमित मरवाही विधानसभा सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी हैं।


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