बुंदेलखंड में 6 मंत्रियों के लिए जीत की चुनौती

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Thursday, November 14, 2013-2:22 PM

भोपाल: मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव में बुंदेलखंड के अधिकांश क्षेत्रों में रोचक मुकाबला होने के आसार हैं। इस इलाके से चुनाव मैदान में उतरे राज्य सरकार के छह मंत्रियों के लिए जीत चुनौती से कम नहीं है। इन मंत्रियों में से अधिकांश पिछला चुनाव कम अंतर से जीते थे। बुंदेलखंड इलाके के चुनाव भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस दोनों के लिए अहम हैं, क्योंकि भाजपा अपने पिछले प्रदर्शन को दोहराना चाहती है तो कांग्रेस यहां बढ़त हासिल कर सत्ता का रास्ता आसान करने की कोशिश में है।

 

इसके लिए दोनों ही दलों ने अपने क्षेत्रीय स्तर के प्रमुख नेताओं को सक्रिय कर दिया है। भाजपा की ओर से राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उमा भारती और कांग्रेस की ओर से राष्ट्रीय प्रवक्ता सत्यव्रत चुतर्वेदी अपने दल के उम्मीदवारों को जिताने के लिए सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड से नाता रखने वाले केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन को भी पार्टी ने यहां सक्रिय किया है। वहीं भाजपा के लिए उमा भारती इस बार बड़ी ताकत हैं, क्योंकि पिछले चुनाव में उन्होंने भाजपा के खिलाफ अपने उम्मीदवार उतारे थे।

 

बुंदेलखंड में मध्य प्रदेश के छह जिले दतिया, छतरपुर, दमोह, टीकमगढ़, पन्ना और सागर आते हैं। इस क्षेत्र में 29 विधानसभा क्षेत्र हैं, इनमें से भारतीय जनता पार्टी का 19 सीटों पर कब्जा है। वहीं कांग्रेस के खाते में सिर्फ सात हैं। इस क्षेत्र से भाजपा सरकार में सात मंत्री थे, जिनमें से छह को भाजपा ने फिर मौका दिया है। सिर्फ रामदयाल अहिरवार का टिकट पार्टी ने काटा है।

 

पिछले चुनाव पर नजर दौड़ाई जाए तो पता चलता है कि भाजपा ने सरकार के मंत्री दतिया से नरोत्तम मिश्रा, दमोह से जयंत मलैया, टीकमगढ़ के जतारा से हरिशंकर खटीक, सागर के रहली से गोपाल भार्गव, पन्ना जिले के पवई से बृजेंद्र प्रताप सिंह को एक बार फिर उतारा है, जबकि मंत्री रामकृष्ण कुसमारिया का क्षेत्र दमोह के पथरिया से बदलकर छतरपुर का राजनगर किया गया है।

 

सरकार के जो छह मंत्री मैदान में हैं उनमें से गोपाल भार्गव व नरोत्तम मिश्रा को छोड़कर सभी की पिछली जीत का अंतर एक हजार से कम वोट रहा है। सूत्रों का कहना है कि पार्टी का जो आंतरिक सर्वेक्षण आया था उसमें भी कई मंत्रियों की स्थिति अच्छी नहीं पाई गई थी। यही कारण है कि पार्टी उन्हें दोबारा मैदान में उतारने के लिए तैयार नहीं थी, मगर नेताओं के बागी तेवरों को देखते हुए न चाहते हुए भी उन्हें उतारना पड़ा है।

 

एक तरफ भाजपा को न चाहते हुए कई मंत्रियों को दोबारा चुनाव लड़ाना पड़ रहा है तो कांग्रेस ने पिछले चुनाव में भाजपा को कड़ी टक्कर देने वाले दलबदलुओं को मैदान में उतारने में हिचक नहीं दिखाई है। कांग्रेस ने छह में से तीन मंत्रियों के खिलाफ दल बदल करने वालों को अपना उम्मीदवार बनाया है। यही कारण है कि यहां मंत्रियों के लिए चुनाव चुनौतीपूर्ण हो गया है।

 

पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ  भारतीय जनशक्ति पार्टी बनाकर मैदान में अपने उम्मीदवार उतारने वाली उमा भारती क्षेत्र के मतदाताओं से इस बार भाजपा के उम्मीदवारों की खूबियां गिनाकर वोट मांग रही हैं। पार्टी के भीतर किसी तरह के असंतोष या जन विरोध को नकारते हुए उमा कहती हैं कि इस बार पिछली बार से स्थिति ठीक है।

 

बुंदेलखंड के वरिष्ठ पत्रकार रवींद्र व्यास का कहना है कि इस इलाके से चुनाव लड़ रहे मंत्रियों के लिए चुनौती तो है, क्योंकि पिछले चुनाव में कई मंत्री बहुत कम अंतर से जीते थे। अब बात यह है कि कांग्रेस इसका लाभ कितना उठा पाती है। चुनाव नतीजे ही यह खुलासा कर पाएंगे कि मंत्रियों ने बीते कार्यकाल में अपने क्षेत्र में किस तरह का काम किया है।


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