चुनावी माहौल में नारे लगाने वाले काट रहे हैं चांदी

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Saturday, November 16, 2013-9:19 PM

नई दिल्ली: विधानसभा चुनाव की नामांकन प्रक्रिया आज खत्म हो गई। नामांकन के साथ ही उम्मीदवारों ने अपना चुनाव प्रचार भी आधिकारिक रूप से शुरू कर दिया है। ऐसे माहौल में बेरोजगार चांदी काट रहे हैं। नारे लगाने वाले दिनभर नेताजी के साथ घूम-घूमकर उनका प्रचार कर रहे हैं। प्रचार खत्म होने के बाद वे अपनी दिहाड़ी लेकर घर चले जाते है। इस तरह कई बेरोजगार भी चुनावी मौसम में अब कमाई कर रहे हैं।

 मतदाताओं में जोश भरने के लिए नेता कई तरह के हथकंडे अपनाते हैं। बगैर नारे के चुनाव प्रचार फीका माना जाता है। इसलिए अधिकतर नेता चुनाव प्रचार के दौरान नारे लगवाने को अच्छा माध्यम मानते हैं। नेता ऐसे लोगों को साथ रखते हैं,जो नारों की बुलंद आवाज के साथ अपना सुर मिलाकर मतदाताओं को रिझाते हैं।

सूत्रों के मुताबिक दिल्ली जैसे व्यस्त शहर में नेताओं को चुनाव प्रचार के लिए आदमियों का टोटा पड़ा है। अब वे चुनाव प्रचार के दौरान नारे लगाने वालों को हायर करने लगे हैं। फिलहाल पैसे लेकर नारे लगाने वाले नेताजी के पक्ष में माहौल बनाने में जुटे है।

नारे लगाने वालों ने चुनाव प्रचार के लिए अलग-अलग पैकेज तैयार कर रखे हैं। मसलन,यदि किसी नेता को कुछ खास मौकों पर नारे लगाने वाले चाहिए तो इसके लिए अलग रेट हैं,अगर कोई नेता दिनभर के चुनाव प्रचार के लिए नारे लगाने वाले को रखता है तो उसके पैकेज अलग हैं। खास मौके पर नारे लगाने के लिए 100 से 150 रूपए में आदमी मिल जाते है। और दिनभर नारे लगाने वालों का रेट 200 से 300 रूपए प्रतिदिन के हिसाब से मिल जाता है। 
 


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