भाजपा नेता भाषण देना जानते हैं काम करना नहीं: राहुल

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Sunday, November 17, 2013-6:12 PM

नई दिल्ली : दक्षिण दिल्ली के अम्बेडकर नगर स्थित दक्षिण पुरी में आयोजित रैली में राहुल गांधी ने भाजपा पर जमकर निशाना साधा। रैली में मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिल्ली प्रभारी डॉ. शकील अहमद ने भी भाजपा और मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी डॉ. हर्षवर्धन पर हमला किया। राहुल गांधी ने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा भाजपा के नेता भाषण देना तो जानते हैं लेकिन काम करना नहीं ।


वहीं दूसरी ओर राहुल ने दिल्ली को मिनी हिन्दुस्तान बताते हुए कहा है कि पूरे देश की उर्जा यहां दिखाई देती है। उन्होने दिल्ली सरकार के गत 15 सालों के काम- काज की खुलकर प्रशंसा की। उन्होने अपील की कि यदि दिल्ली में विकास की गति को जारी रखनी है तो कांग्रेस प्रत्याशियों को विजयी बनाएं।

रैली के दौरान उन्होने कहा कि दिल्ली में उत्तर प्रदेश ,बिहार व अन्य प्रदेश के लोग यहां आकर रहते हैं। मेरा परिवार उत्तर प्रदेश में रहता था, उसके बाद कश्मीर चले गये और फिर दिल्ली आ गया। इसीलिए पूरे हिन्दुस्तान की उर्जा दिल्ली में दिखाई देती है। अन्य राज्यों से यहां आकर बसने वाला व्यक्ति, चाहें वह किसी भी जात का हो, एक जैसा है जबकि कनार्टक और मुंबई में शिवसेना के लोग उन्हें भगा देते हैं।

रैली में मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा कि भाजपा के नेता झूंठे वादे कर रहे हैं, लेकिन जनता को आगाह रहना है। भाजपा के लोग यह प्रचार कर रहे हैं कि दिल्ली में महिलाएं सुरक्षित नहीं है। लेकिन जब इस पार्टी के नेता अपने घर में ही किसी महिला की सुरक्षा नहीं कर सकते, तो क्या वह दिल्ली के काबिल हैं? इसका फैसला सिर्फ जनता को करना है।

इसके साथ ही उन्होंने ‘आप’ पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल को बताना चाहिए कि उनकी राजनैतिक नीति क्या है? दिल्ली की एक अदालत ने भी उनसे पूछा है कि ‘आप’  के पास धन कहां से आ रहा है?

वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के दिल्ली प्रभारी डॉ. शकील अहमद ने आरोप लगाया कि ‘आप’ और भाजपा में अंदरखाने समझौता है। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल ने पहले ही कह दिया था कि जहां से मुख्यमंत्री शीला दीक्षित चुनाव लड़ेंगी, वहीं से मैं भी चुनाव लड़ूंगा। केजरीवाल ने ऐसा क्यों नहीं कहा कि डॉ. हर्षवर्धन के खिलाफ चुनाव लडूंगा। फिर उन्होंने कहा कि डॉ. हर्षवर्धन के खिलाफ कुमार विश्वास चुनाव लड़ेंगे, लेकिन बाद में विश्वास ने भी चुनाव लडऩे से मना कर दिया। आखिर क्या वजह है, जनता को समझ लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि ‘आप’  के प्रत्याशी कांग्रेस काटने के लिए मैदान में हैं, लेकिन जनता को उनके झांसे में नहीं आना है।  


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