पत्नी के चरित्र पर संदेह के चलते की हत्या

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Sunday, November 17, 2013-7:23 PM

नई दिल्ली : चरित्र पर संदेह के चलते पत्नी की हत्या करने वाले एक आरोपी व्यक्ति को राहत देने से इंकार करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस या कोर्ट के अलावा किसी तीसरे व्यक्ति के समक्ष दिया गया इकबालिया बयान अगर अन्य सबूतों से साबित हो जाता है, तो वह मान्य है।

न्यायमूॢत कैलाश गंभीर व न्यायमूॢत इंद्रमीत कौर ने अभियुक्त राधेश्याम को दी गई उम्रकैद की सजा को सही ठहराते हुए कहा कि एक्ट्रा ज्यूडीशियल बयान वह बयान होता है, जो पुलिय या अदालत के अलावा किसी अन्य व्यक्ति के समक्ष दिया जाए। अदालत ने कहा कि ऐसा बयान मान्य होता है, बशर्ते वह स्वेच्छा से दिया गया और कानून के अनुसार उसे अन्य सबूतों की सहायता से साबित कर दिया जाए।

कोई बयान स्वेच्छा से दिया गया था या नहीं, यह हर मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। सिर्फ इस आधार पर किसी इकबालिया बयान को नकारा नहीं जा सकता है कि वह किसी अनजान व्यक्ति के समक्ष दिया गया था।

अदालत ने कहा कि इस मामले में आरोपी ने अपनी पत्नी के चरित्र पर संदेह के चलते उसकी हत्या कर दी। उसके बाद वह उसकी बॉडी को कहीं फेंक कर आना चाहता था, इसके लिए वह टी.एस.आर. किराए पर लेने गया था। ऐसे में उसने टी.एस.आर. के ड्राइवर के समक्ष यह स्वीकार कर लिया कि उसने चरित्र पर संदेह के चलते अपनी पत्नी की हत्या कर दी है और अब उसकी लाश को फेंक कर आना चाहता है।

पुलिस के अनुसार, 18-19 जनवरी, 2006 की रात तिलक नगर इलाके में उनको एक टी.एस.आर. ड्राइवर ने सूचित किया था कि उसके टी.एस.आर. में जो आदमी बैठा है, उसने अपनी पत्नी की हत्या कर दी है। जिसके बाद पुलिसकर्मी, टी.एस.आर. ड्राइवर व आरोपी उसके घर गए, जहां पर उसकी पत्नी पूजा की लाश पड़ी थी।


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