आज होंगे बद्रीनाथ के कपाट बंद, साथ ही चारधाम यात्रा का भी समापन

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Monday, November 18, 2013-9:30 AM

देहरादून: विश्व प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए आज बंद हो जाएंगे और इसके साथ उत्तराखंड में गढ़वाल हिमालय की इस साल की चारधाम यात्रा का भी समापन हो जाएगा।

वर्ष में छह माह तक चलने वाली चारधाम यात्रा हालां कि इस वर्ष जून में आई प्राकृतिक आपदा के कारण तीन महीने से ज्यादा समय तक बाधित रही और इसी वजह से देश विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या भी पिछले सालों के मुकाबले काफी कम रही।   
चमोली जिले की उंची पहाडिय़ों पर स्थित भगवान विष्णु को समर्पित बद्रीनाथ धाम के कपाट आज शाम सात बजकर 38 मिनट पर शीतकाल हेतु श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए जाएंगे।

गढ़वाल हिमालय के चारधामों के रूप में मशहूर तीन अन्य धाम केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट पहले ही बंद किए जा चुके हैं।
रूद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ मंदिर और उत्तरकाशी जिले में यमुनोत्री के कपाट दीवाली के दो दिन बाद भैया दूज के पावन पर्व पर बंद किए गए थे वहीं उत्तरकाशी में ही स्थित गंगोत्री मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए दीवाली के एक दिन बाद अन्नकूट पर्व पर बंद हुए थे।

शीतकाल के दौरान चारों धामों में भीषण ठंड और भारी बर्फवारी की चपेट में रहने के कारण उनके कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए जाते हैं जो अगले साल अप्रैल-मई में फिर खोले दिए जाते हैं।

छह माह के यात्रा सीजन के दौरान चारों धामों के दर्शन के लिए लाखों की संख्या में देश और विदेश के श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं। हालां कि इस वर्ष आई प्राकृतिक आपदा के कारण चारधाम के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या काफी कम रही।

बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के सूत्रों ने बताया इस वर्ष करीब पांच लाख श्रद्धालु ही भगवान विष्णु के धाम बद्रीनाथ पहुंच पाए, जबकि पिछले साल यह संख्या करीब दोगुनी यानी 9.86 लाख थी। इसी तरह, आपदा से सर्वाधिक प्रभावित केदारनाथ मंदिर के गत पांच अक्टूबर को कपाट बंद होने तक केवल 3.12 लाख दर्शनार्थी ही पहुंचे, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 5.73 लाख का था।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इस साल यमुनोत्री पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 2.32 लाख रही, जबकि गंगोत्री के दर्शन करने वालों की संख्या करीब 2.08 लाख रही। गंगोत्री मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल ने बताया कि इस साल मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या पिछले एक दशक में सबसे कम रही।


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