लंच से लेकर डिनर तक जनता के बीच करते हैं हर्षवर्धन

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Monday, November 18, 2013-1:45 PM

नई दिल्ली :  कहते हैं कि वक्त भी उसी का साथ देता है, जो इसका सही उपयोग करना जानता है और जो लोग इस वक्त के तकाजे को समझ नहीं पाते, वक्त या तो उन्हें हाशिए पर धकेल देता है या फिर गुमनाम कर देता है। भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार डॉ. हर्षवर्धन को देख लगता है मानो वक्त की नब्ज को उन्होंने बारीकी से पढ़ा  हो। 

यही वजह है कि जिस जगह पर पहुंचने का सपना हर नेता संजोता है, उस मुकाम पर पहुंचने के रास्ते पर चल चुके हर्षवर्धन अपना एक क्षण भी जाया नहीं जाने देते। जिस वक्त दिल्ली सो रही होती है, वह जरूरी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर रहे होते हैं। सुबह के नाश्ते के साथ जरूरी फाइलों को निपटाना और अपने चुनाव क्षेत्र के हर इलाके में नियमित रूप से पदयात्रा करने के साथ दिल्ली के अन्य विधानसभा क्षेत्रों में जाना। उनकी इसी वयस्त दिनचर्या के दौरान रविवार को हमारे संवाददाता धनंजय कुमार व फोटोग्राफर जगदीश यादव पूरे दिन उनके साथ रहे-:

नाश्ता

डॉ. हर्षवधन हर रोज की तरह रविवार सुबह 7:30 बजे चना व अनार के दानों के साथ नाश्ते की टेबल पर बैठ चुके हैं। सामने उनकी पत्नी बैठी हैं लेकिन उनका ध्यान टेबल पर रखी उन फाइलों पर है जिसे चंद मिनटों में हस्ताक्षर नहीं किया तो आज इनपर हस्ताक्षर करना शायद ही संभव हो पाएगा क्योंकि अगले दिन फाइलों की ढेर और बढ़ जाएगी।

सुबह 8 बजे

अपने घर  से पैदल निकल चुके हैं, पीछे उनकी गाड़ी चल रही है, अपने चुनाव क्षेत्र के अधिक से अधिक लोगों से मिलने के लिए पैदल ही चलते हुए चुनाव क्षेत्र से बाहर निकलने के बाद गाड़ी में बैठ जाते हैं। सुबह 10 बजे वजीरपुर विधानसभा के अशोक विहार इलाके में पहुंचकर पार्टी प्रत्याशी महेंद्र नागपाल के चुनाव कार्यालय का उद्घाटन करना है।

सुबह 10:15 बजे

अशोक विहार में पार्टी कार्यालय का उद्घाटन किया और बिना समय गंवाए 11:30 बजे वहां से शालीमार बाग विधानसभा के प्रत्याशी रविंद्र बंसल की जनसभा को संबोधित करने पहुंच गए। इसी में समय निकालकर पास के गुरुद्वारे में माथा भी टेका और दोपहर करीब 12:30 बजे वहां से तुगलक लेन के लिए निकल गए।

तुगलक लेन की झुग्गियों में भी घूमे

दोपहर करीब डेढ़ बजे तुगलक लेन स्थित झुग्गियों में लोगों से मिलने पहुंच गए। नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र की इन झुग्गियों में लोगों की परेशानियां सुनी और भाजपा के सत्ता में आने पर जहां झुग्गी वहीं, मकान का वादा किया।

मरीजों का इलाज न कर पाने का है मलाल

डॉ. हर्षवर्धन कहते हैं कि मैं समय से नाश्ता तो कर लेता हूं लेकिन मरीजों का इलाज पहले की तरह नहीं कर पाने का मलाल जरूर रहता है। फिर भी इस व्यस्तता के बीच कुछ इमरजेंसी मरीजों को जरूर देख आता हूं। शाम के 7 बज चुके हैं और हर्षवर्धन एक बार फिर अपने चुनाव क्षेत्र में सक्रिय हो चुके हैं और यह सिलसिलसा रात 10 बजे तक चला।

Edited by:Jeta

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