नेताओं को लुभा रही बंगाल की मसलिन खादी

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Tuesday, November 19, 2013-3:06 PM

नई दिल्ली (ताहिर सिद्दीकी): चुनावी दंगल शुरू होते ही बाजार में हर बार की तरह खादी के सफेद कुर्ते-पैजामों की डिमांड बढ़ गई है। नेताओं को इस ड्रेस कोड में सजाने के लिए पार्टी कार्यालयों के बाहर कपड़ा दुकानदारों ने डेरा डाल लिया है। खादी ग्रामोद्योग आयोग की विभिन्न शाखाओं सहित सदर बाजार व चांदनी चौक की दुकानों पर भी सफेद कुर्ता-पैजामा और खादी के कपड़ों की खरीददारी बढऩे लगी है। नेताओं में बंगाल की मसलिन खादी खासी लोकप्रिय है।

भाजपा प्रदेश कार्यालय के बाहर खादी के सफेद कपड़े बेचने वाले मो.मुस्तफा ने बताया कि वह पिछले 15 साल से चुनावों के दौरान यहां सफेद कपड़ा बेचते आ रहे हैं। कपड़ा बेचने के साथ इस बार वह अपने साथ दर्जी भी लेकर आए हैं। वह कहते हैं कि चुनाव के दौरान नेताओं के पास ज्यादा समय नहीं होता, इसलिए कपड़ा बेचने के बाद नाप लेकर कुर्ता-पैजामा का सेट सिलवाने का ऑफर नेताओं को रास आ रहा है।

उन्होंने बताया कि निगम चुनावों में उन्होंने करीब डेढ़ हजार कुर्ता-पैजामा का कपड़ा बेचा था। मुस्तफा का कहना है कि कुछ छुटभैये नेता भी आ जाते हैं जो पहले कुछ एडवांस देकर कपड़े तो बनावा लेते हैं लेकिन फिर उसकी पूरी पेमेंट नहीं करते। कनॉट प्लेस स्थित खादी ग्रामोद्योग की दुकान के इंचार्ज लक्ष्मण ने बताया कि खादी की बिक्री में बढ़ोतरी होने लगी है। यूं तो उनके पास खादी की खूब वेरायटी है लेकिन इस बार नेताओं को सबसे ज्यादा बंगाल की मसलिन खादी पसंद आ रही है।

मसलिन खादी बाजार में 200 से लेकर 900 रुपए प्रति मीटर की दर से उपलब्ध है। इस खादी की खूबी यह है कि यह आम कपड़ों से पतली और पारदर्शी होती है। इससे बने कपड़ों को जितना धोया जाता है उसकी चमक भी उतनी ही बढ़ती है। इसके अलावा उनके दुकान में आन्ध्र प्रदेश की फाइन खादी, राजस्थान की फाइन खादी व सिल्क खादी की भी मांग जोरों पर है। शर्टिंग खादी और मोटे कपड़े वाली कोटिंग खादी भी कुछ नेताओं को पसंद आ रही है। सफेद खादी के कपड़ों के अलावा खादी के सिले-सिलाए कुर्ते-पैजामों की भी डिमांड बढ़ी है। चुनावों के दौरान उनकी बिक्री में 25 फीसदी से अधिक की बढ़ोत्तरी हो गई है।

चांदनी चौक स्थित 83 साल पुरानी गांधी आश्रम दुकान के इंचार्ज राम इकबाल सिंह ने बताया कि हमारे यहां दिल्ली के अलावा अन्य राज्यों के नेता भी खादी की धोती व कुर्ता-पायजामा के कपड़ों की खरीदारी करने आते हैं। उन्होंने बताया कि इस बार कुर्ता-पैजामा के अलावा छुटभैये नेताओं के बीच सफेद पैंट-शर्ट का सेट भी खूब चलन में है। नेताओं की बस एक ही डिमांड रहती है कि कपड़ा इतना सफेद होना चाहिए कि उसके सामने दूध की सफेदी भी फीकी नजर आए।

उन्होंने बताया कि चुनाव के मौसम में एक नेता कम से कम पांच जोड़ी कुर्ता-पैजामा तो बनवाता ही है। जबकि कई नेता ऐसे भी हैं जो चुनाव के पूरे मौसम के हिसाब से कपड़े बनवाते हैं, ताकि रोज-रोज कपड़ों को धुलवाने और उन्हें स्टॉर्च कराने से मुक्ति  मिल जाए। सदर बाजार स्थित पहाड़ी धीरज के दुकानदार संजय जैन ने बताया कि यहां से अधिकतर छोटे नेता ही ड्रैस बनवाते हैं लेकिन चुनावों के दौरान सफेद खादी के कपड़ों की बिक्री काफी होती है। 


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