भाजपा में घमासान, बागियों ने खोला मोर्चा

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Tuesday, November 19, 2013-3:26 PM

नई दिल्ली (धनंजय कुमार): विधानसभा चुनाव में टिकट बंटवारे के बाद मचे घमासान को शांत करने की कोशिशें लगातार जारी हैं लेकिन पार्टी अभी भी इससे उबर नहीं पाई है। कई ऐसे विधानसभा क्षेत्र हैं, जहां बागियों ने भाजपा के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है तो कई विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी को भितरघात का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में चुनाव में पार्टी को नुक्सान होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। भाजपा को भितरघात भारी पड़ सकता है।

जोड़-तोड़ की राजनीति के बाद कई बागी इस बार चुनावी मैदान में तो हैं ही साथ ही भितरघात करने वालों की भी कमी नहीं है। लिहाजा इस चुनाव में भी बागी नेता वोट में सेंध लगाते दिखेंगे। भाजपा विधायक हरशरण सिंह बल्ली का कांग्रेस पार्टी में शामिल होना भाजपा के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। क्योंकि बल्ली न केवल अपने विधानसभा क्षेत्र हरिनगर में अपना प्रभाव रखते है, बल्कि भाजपा के परंपरगत सिखों व पंजाबी बहुल क्षेत्र में भी अपनी पैठ रखते हैं।

भाजपा में अकेले बल्ली सिख विधायक थे। लिहाजा पार्टी को बल्ली जैसे बागी नेता के कारण नुक्सान उठाना पड़ सकता है।  कृष्णानगर विधानसभा की बात करें तो इस क्षेत्र से भी भाजपा के बागी नेता डॉ. वी.के. मोंगा कांग्रेस की टिकट से चुनावी मैदान में हैं। इनके ताल ठोंकने के कारण भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार व इस क्षेत्र के प्रत्याशी डॉ. हर्षवर्धन की जीत की राह में रोड़ा साबित हो सकते हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बनने के बाद डॉ. हर्षवर्धन की स्थिति मजबूत दिखाई पड़ रही है।

पार्टी के जानकारों का कहना है कि इस क्षेत्र से आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी का नाम वापस लेने और नए प्रत्याशी को चुनावी दंगल में उतरने के कारण यहां भाजपा मजबूत हुई है। कालकाजी विधानसभा की अगर बात करें तो यहां से आम आदमी पार्टी की टिकट पर पूर्व पार्षद धर्मवीर चुनावी मैदान में हैं।

लिहाजा यहां से अकाली- भाजपा गठबंधन के तहत चुनावी मैदान में उतरे हरमित सिंह कालका का चुनावी गणित बिगाडऩे की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। उधर, कई नेता तो ऐसे हैं जो बागी तो हैं, लेकिन फिलहाल उन्होंने पार्टी से इस्तीफा नहीं दिया है। लिहाजा महरौली, तीमारपुर, बुराड़ी, त्रिनगर, शकूरबस्ती, मटियाला, बदरपुर, लक्ष्मीनगर व सीलमपुर समेत कई विधानस सीट पर भितरघात का भी सामना पार्टी को करना पड़ सकता है।


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