रैन बसेरों में रहना हुआ मुश्किल

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Tuesday, November 19, 2013-4:57 PM

नई दिल्ली: पश्चिमी दिल्ली के रोहिणी सैक्टर-3 में बेघर लोगों के आसरे के लिए बनाए गए रैन बसेरे में सुविधाओं का घोर अभाव है। एक वर्ष पहले बनाया गया यह टिन शैड जगह-जगह से टूट चुका है। रात के वक्त ठंड से बचने के लिए यहां शरण लेने वालों के लिए पर्याप्त प्रबंध नहीं है।

यहां रैन बसेरों के आस-पास गंदगी का अंबार लगा हुआ है। इतना ही नहीं अकसर इन रैन बसेरों में जानवर घुस आते हैं जिससे यहां रहने वाले लोगों को परेशानी होती है।

क्या थी योजना:
दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड, दिल्ली सरकार द्वारा बेघर लोगों की सुविधा के लिए करोड़ों रुपए की लागत से इस योजना को शुरू किया गया था। इसके तहत अलग-अलग इलाकों में सरकार की ओर से रैन बसेरे बनाए गए।

इनकी जिम्मेदारी विभिन्न एन.जी.ओ. और स्वयंसेवी संस्थाओं को दी गई है। यही संस्थायें रैन बसेरों में व्यवस्था का जिम्मा संभालती है लेकिन रख-रखाव के अभाव के चलते इन रैन बसेरों की हालत अब खस्ता है।

यहां बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं है। जिससे लोगों ने यहां आना कम कर दिया है। बेघर लोग इन रैन बसेरों की बजाए फुटपाथ पर सोना पसंद करते हंै।

फुटपाथ पर सोने को मजबूर हैं लोग:
रैन बसेरा होने के बावजूद भी लोग फुटपाथ पर रात बिताने को मजबूर हैं। दरअसल, रैन बसेरों का बोर्ड न लगे होने के चलते लोगों को आसानी से जानकारी नहीं मिल पाती हैं। यहां केवल दरवाजे के बाहर हाथ से रैन बसेरा लिखा गया है जिसे दूर से देख पाना बेहद मुश्किल है।

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