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महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत लक्ष्मीबाई

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Tuesday, November 19, 2013-4:59 PM

बांदा: वीरांगना लक्ष्मीबाई और झलकारीबाई के राष्ट्रप्रेम, साहस, बलिदान की अमर कहानी बुन्देलखण्ड के इतिहास को गौरान्वित कर महिलाओं के लिए आज भी प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। वीरागंनाओं के पारस्परिक सहयोग, त्याग और आत्मविश्वास दलित सवर्ण का अमिट प्रेम भी राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव का प्रतीक बना हुआ है।

देश की आजादी के लिए वर्ष 1857 की पहली लडाई में जहां राजाओं, नवाबों, देशभक्त साधन सम्पन्न साहसिक नागरिकों ने संघर्ष किया वहीं महारानी लक्ष्मीबाई और झलकारीबाई का राष्ट्रपेम संघर्ष आज भी यादगार बना हुआ है। 19 नवम्बर 1828 को काशी के सुप्रसिद्ध महाविद्वान ब्राह्मण परिवार में जन्मी महरानी लक्ष्मीबाई का पालन पोषण, शिक्षा-दीक्षा, बिठूर, कानपुर में हुई।

बिठूर में मनु और छबीली के नाम से विख्यात महारानी ने युद्ध कौशल की शिक्षा बिठूर में ही ली। झांसी के गंगाधर राव से विवाहोपरान्त वह लक्ष्मीबाई के नाम से विख्यात हुई।

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