जलबोर्ड मीटर घोटाले में सरकार को लगी करोड़ों की चपत

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Tuesday, November 19, 2013-10:33 PM

नई दिल्ली : दिल्ली सरकार के अंतिम समय में एक और बड़ा घोटाला सामने आया है। इस घोटाले में सरकार को करीब डेढ़ सौ करोड़ रुपए की चपत लगी है। घोटाले के सामने आने के बाद सरकार के अंदर हड़कम्प मच गया है। सरकार के नुमाइंदों ने नियम कायदों को ताक पर रखते हुए, उन पानी के उन मीटरों को ही ऊंचे दामों पर खरीद लिया, जिन्हें उनके लिए तय मानकों पर फेल कर दिया गया था।

सूत्रों की मानें तो दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के आदेश पर कुछ समय पहले दिल्ली जल बोर्ड ने नए मीटरों की खरीद के लिए टेंडर जारी किए थे। इसके पीछे तर्क यह दिए जा रहे थे कि पुराने मीटर सही काम नहीं कर रहे हैं, इसलिए विभाग को करोड़ों का नुक्सान हो रहा है। इस आदेश के बाद जलबोर्ड की ओर से आनन-फानन में मीटर खरीद के लिए टेंडर जारी कर दिए गए।

हैरान कर देने वाली बात यह है कि पानी मीटर बनाने वाली करीब एक दर्जन कंपनियों ने टेंडर डाले थे लेकिन सरकार की ओर से टेंडर का काम देख रहे पैनल ने इनमें से करीब आधा दर्जन कंपनियों को शार्टलिस्ट किया और उन्हें डैमो के लिए बुलाया था। पैनल की ओर से हर कंपनी से 30-30 मीटर टैस्ट के लिए मांगे गए थे। जिन्हें बाद में केरला की एफ.सी.आर.आई लैब पालाघाट, में टैस्ट के लिए भेज दिया गया। जलबोर्ड को मीटर सप्लाई करने वाली 2 कंपनियों के मीटर भी वहां भेजे गए। मगर दोनों कंपनियों के मीटर यूरोपियन स्टैंड्र्ड में फेल हो गए।

टेंडर प्रक्रिया में सबसे पहली शर्त यह थी कि जिस कंपनी के मीटर टैस्ट में फेल हो जाएंगे उसकी निविदा निरस्त कर दी जाएगी। मगर ऐसा नहीं हुआ और उल्टा दिल्ली जलबोर्ड के इंजीनियर ने एफ.सी.आर.आई को चिट्टी लिख दोबारा टैस्ट करने का आग्रह किया। इसके साथ ही टैस्ट प्रक्रिया के दौरान कंपनी का एक प्रतिनिधि भी अंदर मौजूद रहेगा। आग्रह पत्र में यूरोपियन स्टैंड्र्ड के स्थान पर भारतीय स्टैंड्र्ड पर मीटर टैस्ट करने की बात लिखी गई थी।

बताया जाता है कि यूरोपियन और भारतीय स्टैंड्र्ड में जमीन आसमान का फर्क था। भारतीय स्टैंड्र्ड के ही मीटर खरीदने थे, तो यूरोपियन क्यों खरीदे गए। पेंच यह भी है कि जो मीटर खरीदे गए वह बाजार भाव से भी ज्यादा कीमत पर खरीदे गए। बाजार में मौजूद इन कंपनियों के डिब्बे पर अधिकतम कीमत 1300 रुपए अंकित है। डीलर मूल्य 775 रुपए है और बाजार में यह मीटर हजार रुपए में मिल रहा है। 5 प्रतिशत वैट सहित यह 1050 रुपए में बाजार में आराम से मिल जाता है।

 जलबोर्ड ने सभी कायदे कानूनों को ताक पर रख कर यही मीटर 1457 रुपए में खरीद लिए। जलबोर्ड द्वारा खरीदे गए मीटर और इन मीटरों पर अंकित मूल्य से 157 रुपए अधिक है। इस हिसाब से सरकार को लगभग करीब 150 करोड़ रुपए की चपत लगी है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने इसकी जांच सी.बी.आई. को सौंप दी है।


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