पैसे को लेकर अन्ना-केजरीवाल में तकरार

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Wednesday, November 20, 2013-9:53 AM

रालेगन सिद्धी/नई दिल्ली: हाल तक साथ निभाने वाले गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे और आम आदमी पार्टी (आप) के नेता अरविंद केजरीवाल मंगलवार को ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन (आईएसी) आंदोलन’ के दौरान एकत्र धन को लेकर आमने-सामने आ गए।

हजारे ने कोष पर सवाल उठाते हुए यह साफ किया है कि उन्हें अरविंद की निष्ठा पर कहीं से भी संदेह नहीं है। सामाजिक कार्यकर्ता से नेता बने केजरीवाल ने कहा है कि यदि यह साबित हो जाता है कि उन्होंने आईएसी आंदोलन के दौरान एकत्र धन का इस्तेमाल अपनी पार्टी के लिए किया है तो वे चुनाव मैदान से हट जाएंगे।

महाराष्ट्र स्थित अपने गांव रालेगन सिद्धी में मीडिया से बातचीत करते हुए हजारे ने आरोप-प्रत्यारोप को ध्यान में रखते हुए कहा, ‘‘मैंने कभी नहीं कहा कि अरविंद भ्रष्ट है या मेरे नाम पर चंदा उगाही कर रहा है।’’

हजारे ने कहा, ‘‘मुझे कुछ शंका है, इसीलिए मैंने उसे पत्र लिखा। यह पत्र निजी तौर पर लिखा गया था और उसने (केजरीवाल) सार्वजनिक किया।’’

नई दिल्ली के रामलीला मैदान में 12 दिनों तक चले अपने आमरण अनशन की ओर इशारा करते हुए हजारे ने कहा, ‘‘मुझे बताया गया था कि इंडिया अगेंस्ट करप्शन आंदोलन के दौरान मेरे नाम पर सिम कार्ड जारी किए गए थे, जिनकी बिक्री से धन जुटाए गए।’’

हजारे ने कहा कि किसी ने सिम कार्डों को लेकर अदालत में अर्जी दायर की है।

इधर नई दिल्ली में केजरीवाल ने कहा, ‘‘आईएसी के दौरान एकत्र धन का कई बार आडिट किया गया। मैं फिर से जांच के लिए तैयार हूं लेकिन अब यह जनता के समक्ष होना चाहिए।’’

केजरीवाल ने कहा, ‘‘अन्ना हजारे इस बात से वाकिफ हैं कि धन का उपयोग कैसे हुआ। इस बारे में हमने अन्ना को कई बार बताया है।’’

उन्होंने कहा कि यदि वह दोषी पाए गए तो चुनाव नहीं लड़ेंगे। केजरीवाल नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र से मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के खिलाफ मैदान में हैं।

हजारे ने कहा कि वह किसी भी पार्टी के लिए चुनाव प्रचार नहीं करेंगे। उन्होंने 29 दिसंबर को जन लोकपाल विधेयक पारित करने के केजरीवाल के दावे पर सवाल खड़ा किया और कहा कि ऐसे विधेयक केवल संसद ही पारित कर सकती है।

हजारे ने यह भी कहा कि उन्हें केजरीवाल का एक जवाब मिला है, लेकिन अभी तक उसे पढ़ा नहीं है।

केजरीवाल ने हालांकि कहा कि हम लोकपाल विधेयक उसी तरह पारित करेंगे जैसे उत्तराखंड में लोकायुक्त विधेयक पारित किया गया।


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