वाइवा का वेटेज घटाने के पक्ष में नहीं: तुलसी राम

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Thursday, November 21, 2013-12:29 AM

नई दिल्ली: दलितों के लिए काम करने वाले और जे.एन.यू. में प्रोफेसर तुलसी राम का कहना है कि वे वाइवा वेटेज घटाने के पक्ष में नहीं है। हालांकि जे.एन.यू., एस.यू. और अन्य छात्र संगठन लगातार जे.एन.यू. प्रशासन से वाइवा वेटेज घटाने की मांग कर रहे हैं।

इसी कड़ी में बुधवार को छात्रसंघ दफ्तर में रात 9 बजे एक मीटिंग भी की गई। छात्रसंघ का आरोप है कि वाइवा नंबर देने में पिछड़े तबके से आने वाले छात्रों के साथ भेदभाव किया जाता है। इसलिए वाइवा के वेटेज को 30 से कम किया जाय।

प्रो. तुलसी राम ने कहा कि कई बार रिटेन एग्जाम से छात्रों के बारे में ठीक से पता नहीं चलता। लेकिन इंटरव्यू या वाइवा के जरिए हम छात्रों की प्रतिभा को ठीक से समझ पाते हैं। उन्होंने कहा कि पिछड़े तबकों से आने वाले छात्रों को वाइवा में प्रोत्साहित भी किया जाता है।

हालांकि उन्होंने इंकार नहीं किया कि कुछ छात्रों के साथ भेदभाव नहीं होते होंगे। लेकिन उन्होंने इसे अपवाद बताया। प्रो. राम ने कहा कि सामान्य तौर पर ऐसा नहीं होता। वहीं जे.एन.यू. के छात्रसंघ का कहना है कि छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव को कम करने के लिए वाइवा वेटेज को 30 से घटाकर 10 किया जाय।

दलित साहित्य पर चर्चित किताबें लिखने वाले लेखक ने कहा कि जे.एन.यू. में आरक्षण नियमों का भी खासतौर पर पालन किया जाता है। उन्होंने कहा कि इंटरनैशनल स्टडीज में पूरी पढ़ाई अंग्रेजी में होने के बावजूद हिन्दी इलाकों से आने वाले छात्रों की पूरी मदद की जाती है।

 


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