कांग्रेस का घोषणा पत्र: सपनों सरीखे वादे

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Thursday, November 21, 2013-1:09 AM

नई दिल्ली(अशोक शर्मा ): दिल्ली की सत्ता पर चौथी बार कब्जा कायम रखने के लिए मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने पार्टी का घोषणापत्र तो जारी कर दिया, लेकिन उसमें किये गये कई वादे सपनों की तरह लगते हैं।

घोषणापत्र में पिछली कई ऐसी बातों का भी उल्लेख किया गया है, जिन्हें दिल्ली सरकार ने आज तक पूरा नहीं किया  है। लेकिन पार्टी ने दिल्ली वालों की दो मुख्य समस्याओं, पहला अनधिकृत कालोनियों को पूरी तरह से नियमित करने और दूसरा दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए घोषणापत्र में कुछ स्पष्ट नहीं किया है।

घोषणापत्र में फिर दोहराया गया है कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांग की जाएगी। इनकी जगह एक एकीकृत कमान का ढांचा लाने की जरूरत है, जो भूमि, नगर निगमों और पुलिस (केन्द्र सरकार व वीवीआईपी लोगों की सुरक्षा मामलों को छोड़कर) जैसे सभी मामलों में फैसला लेने के निर्देश जारी करने में पूर्ण रुप से सक्षम हो।

लेकिन सवाल यह उठता है कि कांग्रेस की दिल्ली में पिछले 15 साल से और केंद्र में भी दस साल से सरकार है। आखिर यह मुद्दा केवल चुनाव के दौरान ही क्यों उठाया जाता है। दिल्ली सरकार ने पुरजोर तरीके से इसके लिए पहले से आवाज क्यों नहीं उठाई।

भाजपा के दिल्ली प्रभारी व वरिष्ठ नेता नितिन गडकरी ने कुछ दिन पहले साफ किया था कि हम इस मांग का समर्थन करते हैं और सत्ता में आने के बाद इस मुद्दे पर ठोस निर्णय लेकर जनता को जवाब देंगे।


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