रेप के आरोपों से युवक बरी, कोर्ट ने कहा लड़की अपनी मर्जी से गई थी

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Thursday, November 21, 2013-3:06 PM

नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने एक नाबालिग का अपहरण और उससे बलात्कार करने के आरोपी एक युवक को बरी कर दिया और कहा कि उसने एक रक्षक की तरह कार्य किया और लड़की को देह व्यापार के दलदल में ढकेले जाने या उसके अभिभावकों द्वारा उसका अवैध उद्देश्यों में इस्तेमाल किए जाने से बचाया।

अदालत ने युवक को यह कहते हुए बरी किया कि यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण कानून (पोस्को) के तहत एक बच्चे के साथ शारीरिक संबंध बनाना एक अपराध है बशर्ते वह एक ‘मारपीट’ प्रकृति का हो लेकिन इस मामले में साढ़े सत्रह वर्ष की लड़की अपनी मर्जी से उसके साथ गई और उस पर कोई भय या अनुचित प्रभाव नहीं था।

अदालत ने कहा, ‘यह उल्लेख किया जाना चाहिए कि 16 से 18 वर्ष की नाजुक आयु के मामले में पास्को की धारा चार की व्याख्या करते हुए जबर्दस्ती, भय, बहलावा या उत्पीड़ऩ की प्रकृति वाले कानून तथा ऐसा कुछ करने के लिए एक व्यक्ति को अपराधी बनाने वाले कानून के बीच अंतर होना चाहिए जो उसने बिना किसी दुर्भावाना या गलत उद्देश्य के किया हो।


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