गैर सरकारी संगठनों की मांग: मिजोरम में गरीबों को मिले सस्ते ताबूत

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Friday, November 22, 2013-12:47 PM

एजल: मिजोरम में गरीब लोगों के लिए मौत भी सस्ती नहीं है क्योंकि शव रखने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले लकड़ी के ताबूत उनकी जेब पर बहुत बोझ डालते हैं। इस बात को ध्यान में रखते हुए गैर सरकारी संगठनों ने 25 नवंबर को मिजोरम में होने वाले चुनाव में उतर रहे राजनीतिक दलों से अनुरोध किया है कि वे बांस से बने सस्ते ताबूतों के बारे में जागरकता पैदा करें जो  राज्य में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं।

 

गैर सरकारी संगठन यंग मिजो एसोसिएशन (वाईएमए) उन लोगों को बांस के ताबूत मुहैया कराता है जो लड़की के ताबूत का खर्च वहन नहीं कर सकते। वाईएमए के महासचिव वानलालरआता ने कहा, ‘‘ हम जब भी सुनते हैं कि किसी गरीब की मौत हुई है और उसके परिवार के पास ताबूत खरीदने के लिए धन नहीं है तो हम उसे बांस का बना सस्ता ताबूत मुफ्त मुहैया कराते हैं।’’

 

राज्य में लकड़ी के बने ताबूत की कीमत 4000 रुपए से शुरू होती है जबकि बांस के बने ताबूत की कीमत मात्र 1500 रुपए है लेकिन जागरकता का अभाव और बांस के ताबूत बनाने वालों को सरकारी सहायता की कमी के कारण इसका थोक उत्पादन बंद हो रहा है जिससे इसकी बिक्री पर भी असर पड़ रहा है।


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