पूर्व राष्ट्रपति डा.शंकर दयाल शर्मा के भाई को तीन साल की सजा

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Friday, November 22, 2013-2:20 PM

भोपाल: भोपाल की एक अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति स्व. डा.शंकर दयाल शर्मा के भाई को धोखाधड़ी के आरोप में तीन साल के कारवास और एक हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। अभियोजन के अनुसार भोपाल के गुलिया दाई मोहला निवासी डा.शंभूदयाल शर्मा सतपुडा भवन में जिला कुष्ठ अधिकारी के तौर पर पदस्थ थे। 26 जून 95 को उन्होंने एक आवेदन पर रामसनेही नामक व्यक्ति को एनएनएम पद के इंटरव्यू के लिए बुलाया था परंतु इंटरव्यू के बाद उन्होंने रामसनेही को बताया कि चूंकि वह हायर सेकेंडरी पास नहीं है इसलिए उसे इस पद पर नहीं रखा जा सकता है लेकिन उसे भृत्य के पद पर रखा जा सकता है।

 

रामसनेही की सहमति के बाद उन्होंने एक जुलाई 95 से उसे भृत्य के पद पर रखते हुए उसे अपने घर पर तैनात कर लिया और उसे वे पांच सौ रुपए महीना वेतन देते थे। रामसनेही को बाद में विभाग से पता चला कि उसे दो हजार रुपए वेतन पर रखा गया है लेकिन उसे मात्र पांच सौ रुपए ही दिये जा रहे हैं। इस बात की जानकारी मिलने के बाद रामसनेही ने नौकरी छोड़ दी असैर विभागीय अधिकारियों एवं जिला कलेक्टर को आवेदन देकर डा.शर्मा के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग की।

 

तत्कालीन जिला कलेक्टर के निर्देश पर थाना टी.टी.नगर ने डा.शर्मा के खिलाफ भादंवि की धारा 420, 406, 467 एवं 468 के तहत प्रकरण दर्ज कर मामला अदालत में पेश किया था। न्यायिक मजिस्ट्रेट वर्षा शर्मा ने आज उक्त धाराओं के तहत डा.शर्मा को तीन साल की कैद एवं एक हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।


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