सीहोर को रास नहीं आते कांग्रेस के बदले चेहरे

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Friday, November 22, 2013-4:31 PM

सीहोर: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल की सीमा से सटा सीहोर विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस को कभी रास नहीं आया। यहां 1977 के चुनाव से लेकर अब तक के हुए चुनावों में कांग्रेस ने हमेशा जीत की उम्मीद से नए चेहरों को प्राथमिका दी। लेकिन कांग्रेस के इन नए चेहरों को जनता का साथ नहीं मिला और वे चुनाव हार गए। कांग्रेस द्वारा इस बार के चुनाव में हरीश राठौर को चुनावी मैदान में उतारने से नाराज कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने निर्दलीय रूप से चुनाव लड़ रहे कांग्रेस के बागी उम्मीदवार सुरेश राय का साथ देने से यहां त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है और ऐसे में कांग्रेस प्रत्याशी को एक बार फिर मुश्किलों के सामना करना पड सकता है।

 

राजधानी से सबसे नजदीकी वाला जिला सीहोर 1977 से पहले इछावर विधानसभा क्षेत्र के साथ था तब तक इस क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी ही चुनाव जीतते रहे1 लेकिन 1977 में सीहोर और इछावर पृथक क्षेत्र हो गए तब पहला चुनाव कांग्रेस के अजीज कुरैशी और जनता पार्टी की सविता वाजपेयी ने चुनाव लड़ा। इसमें सविता वाजपेयी ने कांग्रेस के कुरैशी को पटकनी देते हुए चुनाव जीत लिया।

 

वर्ष 1980 के चुनाव में कांग्रेस ने एक बार फिर चेहरा बदलते हुए अमरचंद्र रोहिला को अपना नया उम्मीदवार बनाया जिन्हें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सुन्दरलाल पटवा ने हरा दिया। कांग्रेस ने 1985 में इस बार फिर चेहरा बदला और पत्रकरिता से जुड़े शंकरलाल साबू को अपना उम्मीदवार बनाया।

 

साबू क्षेत्र के विख्यात पत्रकार थे। इसका लाभ कांग्रेस को मिला और वे उनकी उम्मीदों पर खरा उतरते हुए चुनाव जीत लिया था। विधानसभा में भी उन्हें उनकी सक्रियता के लिए जागरूक विधायक उपाधि से सम्मानित किया। उनका कार्यकाल उपलब्धियों भरा होने और उनके लोकप्रिय होने के बाद भी कांग्रेस ने वर्ष 1990 के चुनाव में दूसरी बार उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया।


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