मोदी के खिलाफ जनहित याचिका पर SC का विचार से इंकार

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Saturday, November 23, 2013-8:21 AM

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने 2012 के विधानसभा चुनाव में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा वैवाहिक स्थिति से संबंधित स्थान रिक्त छोडऩे को लेकर दायर जनहित याचिका पर आज विचार करने इंकार कर दिया। न्यायालय ने कहा कि यह याचिका सिर्फ एक व्यक्ति से संबंधित है और इसे ‘राजनीतिक प्रतिद्वन्द्विता’ का नमूना कहा जा सकता है।

प्रधान न्यायाधीश पी सदाशिवम और न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की खंडपीठ ने याचिका अस्वीकार करते हुए कहा कि यह जनहित का विषय नहीं हो सकता क्योंकि यह सिर्फ एक व्यक्ति से ही संबंधित है। न्यायाधीशों ने कहा, ‘‘यह राजनीतिक प्रतिद्वन्द्विता का नमूना हो सकता है।’’ न्यायालय ने कहा कि मुख्य चुनाव अधिकारी पहले ही इस मसले पर विचार कर चुका है।

यह जनहित याचिका सामाजिक कार्यकर्ता सुनील सराव्गी ने दायर की थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि नरेन्द्र मोदी ने गुजरात में 2012 के विधानसभा चुनाव में अधूरा नामांकन पत्र दाखिल किया था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि मोदी ने नामांकन पत्र में अपनी वैवाहिक स्थिति, जीवनसंगिनी का नाम और उसकी संपत्ति तथा जिम्मेदारियों का विवरण नहीं भरा था।

याचिका में शीर्ष अदालत के हाल ही के फैसले का भी हवाला दिया गया था कि ऐसे हलफनामों को अस्वीकार कर दिया जाना चाहिए। याचिका में चुनाव अधिकारी का 21 जनवरी, 2012 का निर्णय निरस्त करने का भी अनुरोध किया गया थ। मोदी ने गुजरात की मणिनगर विधान सभा क्षेत्र से 2012 के चुनाव में विजय हासिल की थी।


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