मुंबई हमला : धुंधली हो चली हैं स्मृतियां

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Saturday, November 23, 2013-4:44 PM

मुंबई: मुंबई में पांच वर्ष पहले हुए आतंकवादी हमले की यादें शहर के लोगों को एक दुस्वप्र की तरह भले ही लगती हों लेकिन उनका असर काफी कम हो गया है। इस हमले के शिकार हुए लोगों और उसमें जीवित बचे लोगों के परिवार के सदस्य तथा अन्य लोग जीवन की दौड़ में हमले की यादों को करीब-करीब भुला चुके हैं। मीडिया कवरेज और औपचारिक कार्यक्रमों के अलावा भारत की वित्तीय और मनोरंजन की राजधानी मुंबई पर चले 60 घंटे के हमले का शायद ही कोई प्रमाण दिखाई देता है।

पाकिस्तान के 10 हथियारबंद आतंकवादियों द्वारा किए गए हमले में कुल मिलाकर 166 लोगों की मौत हुई थी। इनमें 26 विदेशी थे। हमले में 300 लोग घायल हुए और भारी मात्रा में सार्वजनिक तथा निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचा। देश की सामाजिक-राजनीतिक मानसिकता को इससे कहीं अधिक नुकसान हुआ। जैसे-जैसे हमले की तिथि समीप आती जा रही है उसकी यादें एक बार फिर प्रभावी होने लगी हैं।

इस हमले को पूरी दुनिया के करोड़ों लोगों की तरह टेलीविजन पर देखने वाली विले पार्ले की साफ्टवेयर सलाहकार दुकुल पांड्या ने कहा, ‘जो भी हुआ वास्तव में दुखद था और नहीं होना चाहिए था। हम पीड़ितों को याद करते हैं। अब हम सभी को आगे बढऩा और भविष्य के बारे में सोचना होगा।’ बोरीवली की मध्यवर्गीय गृहणी के.एस.मीनाक्षी ने कहा, ‘वह एक बड़ी राष्ट्रीय त्रासदी थी और हर किसी को खराब महसूस हुआ, खासकर निर्दोष पीड़ितों के बारे में। लेकिन हम लगातार दैनिक जीवन की बड़ी समस्याओं से जूझ रहे हैं, खासकर तेजी से बढ़ती महंगाई को लेकर।’


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