FACEBOOK और TWITTER को भारतीय कानून के दायरे में लाने की सिफारिश

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Sunday, November 24, 2013-10:06 AM

नर्इ दिल्ली: फेसबुक और ट्विटर जैसी सोशल साइटों को भारतीय कानून के तहत लाने की सिफारिश आज प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से की गयी । दुनिया के कुछ अन्य देशों में ऐसे प्रावधान  हैं। खुफिया ब्यूरो के निदेशक आसिफ इब्राहिम ने पुलिस महानिदेशकों और पुलिस महानिरीक्षकों के वार्षिक सम्मेलन के अंतिम दिन प्रधानमंत्री के स्वागत भाषण में यह बात कही।

पिछले दो दिनों के दौरान हुई चर्चाओं के बारे में इब्राहिम ने कहा कि साइबर जगत की चुनौतियों से निपटने के लिए उठाये जाने वाले कदमों पर बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि हाल की कुछ सांप्रदायिक वारदात ने साबित किया है कि सोशल मीडिया का दुरूपयोग लोगों को भडकाने के लिए किया जा रहा है । ऐसा पाया गया है कि भारत में सुरक्षा एजेंसियां जहां तकनीकी एवं प्रक्रियागत बाधाओं की वजह से पंगु हैं, वहीं विदेशी कानून प्रवर्तन एजेंसियों की सोशल मीडिया तक स्वतंत्र पहुंच है।

इब्राहिम ने सिफारिश की कि विदेशी कंटेंट प्रदाताओं को भारतीय कानून के दायरे में लाया जाना  चाहिए। संपर्क करने पर कंप्यूटर इमरजेंसी रेस्पांस टीम-इंडिया के महानिदेशक गुलशन राय ने कहा कि विदेशी कंटेंट प्रदाता फेसबुक और ट्विटर जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट हैं और यदि (इब्राहिम की) सिफारिश मान ली जाती है तो ये साइटें भारतीय कानून के लिए जवाबदेह बन जाएंगी । इब्राहिम ने प्रधानमंत्री से कहा कि सार्वजनिक प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की ओर से गैर घातक हथियारों का इस्तेमाल शुरू किये जाने के फैसले से काफी फायदा हुआ है।

उन्होंने कहा कि इसी की वजह से संसद हमले के दोषी अफजल गुरू को फांसी दिये जाने के बाद इस साल जम्मू कश्मीर में केवल तीन लोगों की जान गर्इ । 2010 के सार्वजनिक प्रदर्शनों के दौरान यह आंकडा 113 था। इब्राहिम ने कहा कि जम्मू कश्मीर में राज्य को अस्थिर करने के काफी प्रयास किये गये लेकिन सुरक्षा  एजेंसियों के बीच प्रभावशाली समन्वय से ऐसा करने की मंशा रखने वालों को हताशा हुई।

उन्होंने कहा कि लश्कर ए तय्यबा और हिजबुल मुजाहिदीन में मौजूद तत्वों ने हालांकि सुरक्षाबलों को निशाना बनाया ताकि सुरक्षाबलों को तीव्र प्रतिक्रिया के लिए प्रेरित किया जा सके और बाद में इसे आंदोलन की शक्ल दे दी जाए। इब्राहिम ने कहा कि अलगाववादियों के प्रदर्शनों के प्रयासों से भी कुछ फर्क नहीं पडा और राज्य की जनता ने मुख्यधारा की राजनीतिक प्रक्रिया में अपनी आस्था व्यक्त की ।
 


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