कुणाल की जमानत याचिका खारिज, 5 दिनों की पुलिस हिरासत में भेजे गए

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Sunday, November 24, 2013-4:25 PM

कोलकाता: अदालत ने शारदा फर्जी निवेश योजना मामले में गिरफ्तार तृणमूल कांग्रेस के निलंबित सदस्य एवं सांसद कुणाल घोष की जमानत याचिका आज खारिज करते हुए उन्हें 5 दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया।  कुणाल को आज कड़ी सुरक्षा के बीच विधाननगर के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अपूर्व कुमार घोष के समक्ष पेश किया गया, जिसके बाद उन्होंने यह आदेश दिया।

कुणाल के वकील ने जहां उन्हें जमानत देने की मांग की थी, वहीं पुलिस मामले में आगे की जांच के लिए कुणाल को सात दिनों की पुलिस हिरासत में भेजने की मांग कर रही थी।  इस राज्यसभा सदस्य को शारदा फर्जी निवेश मामले में कल रात गिरफ्तार किया गया था।

पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण सितंबर महीने में तृणमूल कांग्रेस से निलंबित किए गए कुणाल ने न्यायाधीश के समक्ष कुछ बोलने की कोशिश की, लेकिन उन्हें इसकी इजाजत नहीं मिली।  ब्रॉडकास्ट वल्र्डवाइड नामक कंपनी के महाप्रबंधक द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के संबंध में उन्हें गिरफ्तार किया गया था।

कुणाल ने अदालत के बाहर संवाददाताओं से कहा कि पुलिस के कथित कू्रर रवैये के विरोध में वह कल रात से भूख हड़ताल पर हैं। कल रात हुई गिरफ्तारी से पहले इस राज्यसभा सदस्य ने विधाननगर पुलिस आयुक्तालय के जासूसी विभाग के उपायुक्त अर्णव घोष पर ‘आपराधिक ब्लैकमेलिंग’ का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

कुणाल घोष के आवास पर छापा, हार्ड डिस्क बरामद

कुणाल घोष के उत्तर कोलकाता स्थित आवास पर आज छापा मारा। घोष कल शारदा समूह फर्जी निवेश घोटाले के संबंध मे गिरफ्तार कर लिया गया। घोष को भी छापे वाली टीम के साथ लाया गया था। सूत्रों ने कहा कि घोष के घर से एक कम्प्यूटर का हार्डडिस्क भी जब्त किया गया। आवास पर छापे की कार्रवाई सुबह ही शुरू हुई और एक घंटे से अधिक समय तक चली।

सूत्रों ने कहा कि इस बीच पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि घोष ने कल फेसबुक पर पोस्ट कैसे किया जबकि वह पहले ही गिरफ्तार हो चुके थे। पुलिस ने पाया कि उनके मित्रों में से एक और उनके एक नये चैनल के इनपुट एडिटर सोशल नेटवर्किंग साइट पर पोस्ट डालने में शामिल थे। सूत्रों ने बताया कि पुलिस दोनों से पूछताछ कर रही है।  उस पोस्ट में घोष ने अपनी गिरफ्तारी को ‘‘षड्यंत्र’’ करार दिया और कहा कि पुलिस को मामले की सच्चाई का पता लगाने के लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस पार्टी के दो अन्य नेताओं की मदद लेनी चाहिए।

उन्होंने यह भी मांग कि चिटफंड घोटाले की जांच तत्काल सीबीआई को सौंप दी जानी चाहिए।  एक समय घोष पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के साथ अच्छे संबंधों के लिए जाने जाते थे लेकिन मामले में नाम सामने आने के बाद वह अपनी पार्टी के खिलाफ हो गए हैं।  ममता ने घोष को गत सितम्बर में उस समय तृणमूल कांग्रेस से निलंबित कर दिया था जब उन्होंने पार्टी के खिलाफ अरूचिकर टिप्पणियां की थीं।


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