‘मैं तो जानता ही नही अंधेरा होता क्या है’

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Sunday, November 24, 2013-3:05 PM

नई दिल्ली: ठहराव और संतोष से भरी उस प्रौढ़, नेत्रहीन की आवाज पूरे महौल में गूंजती-सी लगी मेरे लिए आपका यह सवाल ही बेमायने है कि मैं रोशनी के बारे में क्या सोचता हूं। दरअसल मैं तो जानता ही नही अंधेरा होता क्या है। मेरी दुनिया एक रोशन
दुनिया है। उनके साथ बैठी उनकी नेत्रहीन पत्नी-पति की बात पर सहमति से मंद-मंद मुस्कराती हैं साथ ही पूरी तल्लीनता से पति की
बुशर्ट पकड़ उस का टूटा बटन टांकती भी जाती है।

 

देश के सुदूरवर्ती पश्चिमी तटीय समुद्री क्षेत्र ‘दहाड़े’ भरती समुद्र की लहरों पर हिचकोले खाते हुए जाल से पूरी सावधानी से मछलियां पकड़ता नेत्रहीन युवा और मछलियां निकाल कर उनका करीने से लगाने के बाद छू-छूकर जाल के टूटे हिस्सों को सीलने की तैयारी में जुटा वही युवा नेत्रहीन। ऐसे ही एक तटीय इलाके में नारियल के पेड़ पर सरपट चढ़ता एक और नेत्रहीन युवा, दनादन नारियल तोड़ उन्हें जमीन पर गिराता या फिर कलकत्ता के देहाती क्षेत्र में रहने वाला नेत्रहीन युवा जिसकी सम्पति उसके परिवार वालों ने उसकी नेत्रहीनता की वजह से छीन ली लेकिन उस युवक ने अपने जुझारूपन से न केवल अपनी सम्पति वापस लेने की सफल लड़ाई लड़ी और दुनिया को दिखाया शारीरिक रूप से चुनौती वाला वह था या उसके परिवार जन।

 

राष्ट्रपति भवन में हाल में आयोजित एक संवेदनशील अनूठे समारोह में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को ऐसे ही जुझारू नेत्रहीन युवाओं के असाधारण जीवन की चुनौतियों, उनकी उम्मीदों, नाउम्मीदों, विजय कमजोर पडऩे के क्षेत्रों से उबरने के बारे में लिखी गई पुस्तक ‘छिलाईट विद इन’ पुस्तक की प्रथम प्रति भेंट की गई। भारत की मशहूर फोटो पत्रकार शिप्रा दास द्वारा खींचे गए चित्रों व आलेख वाली पुस्तक की प्रथम प्रति दो नेत्रहीन जुड़वा किशोरियों प्रज्ञा और प्राची ने राष्ट्रपति को भेंट की।

 

इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, उच्चतम न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति पी.सदाशिवम, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी पोलित ब्यूरो की सदस्य वृंदाकरात व दि ट्रिब्यून समाचारपत्र के प्रधान संपादक राज चेंगप्पा सहित बडी तादाद में ऐसे ही जुझारू व जिंदगी से भरपूर लोग तथा अनेक बुद्धिजीवी व विशिष्ट जन मौजूद थे।

 

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने समाज के सभी वर्गों से आह्वान किया कि अपने अदम्य साहस से चुनौतियों से जूझ रहे इन लोगों का जीवन आसान व बेहतर बनाने के लिए नवीनतम तकनीक विकसित करें और समाजिक आर्थिक नीतियां बनाए जाते समय भी इनका समाज की मुख्य धारा में शामिल किए जाने पर विशेष बल दिया जाए।

 

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने पुस्तक को ‘अनूठी’ बताते हुए कहा ‘आशा, सतत, प्रयास व अदम्य साहस से इन्होंने अपना जीवन गढ़ा और साबित कर दिया कि कोई भी मंजिल असंभव नही होती। इस अवसर पर आडवाणी, न्यायमूर्ति सदाशिवम व करात ने भी इनके अदम्य साहस व जुझारपन को पूरे समाज के लिए आदर्श बताते हुए कहा इन्होंने सभी सीमाओं और बंधनों को तोड़कर समान अवसरों का स्वर्णिम अध्याय रचा है जरूरत है समाज भी इन्हें इसी भावना से देखें।

 

इस अवसर पर दोनों नेत्रहीन बच्चियों प्रज्ञा व प्राची ने अपने प्रेरणास्पद व जीवन से भरपूर उद्धबोधन से सभी का मन जीत लिया और सभागार लगातार तालियों की गडगड़़ाहट से गूंजता रहा। उन्होंने कहा वे ईश्वर की विशेष संताने हैं और इस दुनिया में अपनी अमिट छाप छोडऩे के लिए प्रयासरत हैं। रंगों कें नहाए उनके जीवन में विचारों की शक्ति है। कुछ कर सकने की चाह है।


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