कांग्रेस से शिकवा-शिकायत तो है पर तल्खी नहीं

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Monday, November 25, 2013-12:39 PM

नई दिल्ली (सतेन्द्र त्रिपाठी): रैली में आए बुजुर्गों में बस सोनिया गांधी को सुनने की दिलचस्पी ज्यादा नजर आई। उनका साफ कहना था नेताओं के भाषण अगर जमीन पर भी सच्चे हो जाए तो सब ठीक हो जाएगा। मुस्लिमों के बच्चों के लिए आज भी शिक्षा का उचित प्रबंध नहीं है। सरकारी स्कूलों में सुविधाएं नहीं हैं और न ही टीचर हैं।

इलाके के एकमात्र अस्पताल की हालत इतनी बदतर है कि पूछो मत। केवल भाजपा का डर दिखाकर कब तक मुसलमानों को ठगा जाएगा। दक्षिणी दिल्ली नहीं बल्कि  उत्तर पूर्वी दिल्ली की बदतर हालत पर भी नजर डालो। वहीं इससे उलट कुछ बुजुर्गों का कहना था कि वह तो पुराने कांग्रेसी है, जीतेगी तो कांग्रेस ही।

मौ. हनीफ व मौ. उस्मान का कहना था कि वह तो मोदी नगर के रहने वाले है, पता लगा कि मैडम सोनिया आ रही है तो बस चले आए सुनने। अब देखते है कि मैडम मंहगाई के लिए क्या बोलती कांग्रेस से शिकवा-शिकायत भी लेकिन तल्खी नहीं हैं। बाबू खान का कहना था कि गरीबों के मुंह से निवाला ही छीन गया है। इस बार तो सोचना पड़ेगा कि वोट किसे दे। रैली में तो बस देखने चले आए कि क्या हो रहा है।

शास्त्री पार्क चांद मस्जिद के इमाम मौलाना दीन मौ. का कहना था कि इलाके में शिक्षा की हालत खराब है। स्कूल में टीचर नहीं है, बच्चों को किताबें नहीं मिल पाती है। आखिर गरीबों के बच्चे कैसे पढ़ेंगे। इलाके में जगप्रवेश चंद के नाम पर अस्पताल तो बना दिया है, लेकिन इसमें तो मामूली सुविधाएं भी नहीं है। कांग्रेस को इन मूलभूत मुद्दों पर ध्यान देना होगा।

गुलजार अहमद का कहना था कि जैसा भाषण देते हैं तो वैसे कुछ करके भी दिखाएं। शीलाजी के बड़े-बड़े दावे तो अच्छे लगते है, लेकिन जमीन पर हकीकत कुछ नहीं नजर आती। बुजुर्ग शकीलउर रहमान व हाकीम खान का कहना था कि कांग्र्रेस कम से कम फिरकापरस्त तो नहीं है। हिन्दू-मुस्लिमों में भेदभाव तो नहीं करती है। दंगे तो नहीं करती है।

कांग्रेस ने 60 साल में देश में बहुत तरक्की कराई है। जाफराबाद के चौधरी रहीसुद्दीन का कहना था कि 20 साल से चौधरी मतीन अहमद सबको साथ लेकर चल रहे हैं। ऐसा नेता मिलना मुश्किल है। विकास के काम भी जमकर हुए है। भाजपा व बसपा के निगम  पार्षदों ने तरक्की में रोड़े  जरूर अटकाए हैं। 

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