उत्तर-पूर्वी दिल्ली, होगा कांटे का मुकाबला

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Monday, November 25, 2013-1:32 PM

नई दिल्ली (कुमार गजेन्द्र): उत्तर-पूर्वी जिला, कांग्रेस सांसद और दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जयप्रकाश अग्रवाल का इलाका है। यह पूरा इलाका मुस्लिम बाहुल्य है और इसे कांग्रेस का गढ़ माना जाता है लेकिन पिछले चुनावों में भाजपा के अलावा बहुजन समाज पार्टी ने भी अच्छा प्रदर्शन किया था। पिछली बार यहां 5 सीटें जीतकर कांग्रेस पहले नंबर पर थी, जबकि दूसरे नंबर पर भारतीय जनता पार्टी रही लेकिन बसपा ने यहां कई पार्टियों का खेल बिगड़ कर रख दिया था। बसपा का की यहां एक सीट आई थी।

पिछले आंकड़ों पर नजर डालें तो तिमारपुर से कांग्रेस के मौजूदा विधायक सुरेन्द्र पाल बिटटू को कुल 39,997 वोट मिले थे लेकिन इस बात इस सीट पर मुकाबला कांटे का होगा। सीलमपुर सीट भी हमेशा से ही कांग्रेस के पास रही है। चौधरी मतीन यहां से विधायक हैं, मतीन हमेशा से भारी मतों से जीतते आए हैं। यह सीट एक बार फिर कांग्रेस के पास ही जा सकती है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मतीन का पूरे इलाके में बोलबाला है। पिछले चुनाव में मतीन को कुल 47,820 वोट मिले थे, जबकि उनके प्रतिद्वंदी भाजपा के सीता राम गुप्ता को मात्र 21, 546 वोट ही मिले थे। जिसके चलते उन्हें हरा पाना मुश्किल माना जाता है।
करावल नगर सीट पर भाजपा के मोहन सिंह बिष्ट का कब्जा है। यह सीट हमेशा से भाजपा के पास रही है।

पिछले चुनाव में बिष्ट को 43,980 मिले थे। कांग्रेस यहां तीसरे नंबर पर पिछड़ गई थी। जीत का अंतर कुल वोटों का आधे से अधिक रहा था। इसी तरह बाबरपुर सीट से भाजपा के नरेश गौड़ विधायक हैं। इस सीट पर कशमकश की स्थिति बनी हुई है। अगली सीट रोहताश नगर है, मौजूदा विधायक हैं विपिन शर्मा। विपिन पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष रामबाबू शर्मा के बेटे हैं। इस सीट पर वह रामबाबू शर्मा के निधन के बाद पिता की विरासत को संभाल रहे हैं। रामबाबू शर्मा के साथ लोगों के लगाव के चलते यह सीट इस बार भी कांग्रेस के पास जा सकती है।

सीमापुरी सीट हमेशा से कांग्रेस के पास ही रही है। मौजूदा विधायक वीर सिंह धिंगान को पिछली बार यहां से 43,864 वोट मिले थे, जबकि उनके सामने भाजपा के चंद्रपाल को मात्र 24,604 वोट ही मिल पाए थे। घौंडा सीट पर इस बार कुछ भी हो सकता है। इस सीट पर पिछली बार भाजपा के साहिब सिंह चौहान जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। चौहान को 35,226 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस के भीष्म शर्मा को 34,646 वोट मिले थे, जीत का अंदर एक हजार के आस-पास ही रहा था।

गोकुलपुर सीट पर पिछली बार सभी संभावनाओं को नकारते हुए बसपा के सुरेन्द्र कुमार जीते थे। रिजर्व सीट पर सुरेन्द्र को 27,499 वोट मिले थे। जीत का अंतर बेहद कम था, इसलिए यहां भी उलटफेर हो सकता है। मुस्तफाबाद सीट पर फिलहाल कांग्रेस के हसन अहमद का कब्जा है। उन्हें पिछले चुनावों में 39,838 वोट मिले थे। जीत का अंतर इस सीट पर भी कम ही था, इसलिए माना जा रहा है कि यहां भी ऊंट किस करवट बैठगा कुछ नही कहा जा सकता। अंतिम सीट आती है, बुराड़ी। इस सीट पर भाजपा का कब्जा है, मौजूदा विधायक श्रीकृष्ण त्यागी हैं।


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