नारायण साईं की याचिका पर गुजरात सरकार को हाई कोर्ट का नोटिस

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Monday, November 25, 2013-5:34 PM

अहमदाबाद: गुजरात उच्च न्यायालय ने आसाराम के पुत्र नारायण साईं की एक याचिका पर आज राज्य सरकार को नोटिस जारी किया। नारायण साईं ने अपने खिलाफ दर्ज यौन उत्पीड़ऩ के एक मामले में सूरत की एक अदालत द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट को रद्द करने की मांग करते हुए याचिका दाखिल की है। न्यायमूर्ति हर्ष देवानी ने मामले की सुनवाई के लिए 27 नवंबर की तारीख मुकर्रर की।  दो बहनों ने पिता और पुत्र पर यौन उत्पीड़ऩ का आरोप लगाते हुए शिकायतें दर्ज करायी थीं। उन शिकायतों के आधार पर सूरत पुलिस ने छह अक्तूबर को नारायण साईं और आसाराम के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।

सूरत पुलिस ने दंड प्रक्रिया संहिता के तहत 28 अक्तूबर को साई के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। फरार नारायण साईं के वकील ने आज दलील दी कि याचिकाकर्ता को सीआरपीसी की धारा 70 के तहत जांच एजेंसी के समक्ष उपस्थित होने को कहा गया था जबकि उन्होंने प्राथमिकी दर्ज किए जाने के पांच दिनों के अंदर ही अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया था। वकील ने दलील दी कि वारंट का निष्पादन उन्हें अग्रिम जमानत मांगने के अधिकार से वंचित करने के समान होगा।  हालांकि अतिरिक्त लोक अभियोजक आर एस कोडेकर ने दलील दी कि अदालत ने नारायण साई को ‘‘भगोड़ा’’ घोषित कर दिया है और उनका आचरण चिंता का विषय है।  दो बहनों में से छोटी बहन ने आरोप लगाया था कि साईं ने 2002 से 2005 के बीच उसका बार बार यौन उत्पीड़ऩ किया। उस समय वह आसाराम के सूरत आश्रम में रह रही थी। बड़ी बहन ने आसाराम पर यौन उत्पीड़ऩ का आरोप लगाया था।
 


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