जबरन मिलों को चालू करने से क्या गन्नें का हो पाएगा भुगतान

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Monday, November 25, 2013-8:57 PM

मुजफ्फरनगर: (राकेश): निजी मिलें चालू करने को लेकर गन्ना मिल मालिकों से यू.पी. के मुख्य मंत्री के साथ बैठक हुई। इसमें निर्णय टल गया है, जो कि 26 तारीख की बैठक में लिया जाएगा। गन्ने के बकाया का भुगतान मिलें नहीं कर पा रही है। ऐसे में निजी मिलों को जबरन चालू कराने पर, यहां सवाल उठता है कि क्या मिलें चालू सीजन का भुगतान कर पाएंगी?

यू.पी. के मुख्य मंत्री अखिलेश यादव से मिल मालिकों की बैठक गत देर रात लखनऊ में हुई, इसमें बजाज के मिल ग्रुप से कुशाग्र बजाज, बलरामपुर गु्रप से विवेक सरावगी, त्रिवेणी ग्रुप से तरूण साहनी, गोतम डालमिया तथा उत्तम गु्रप से राजकुमार शामिल हुए। इस दौरान यादव ने चीनी के आयात की समस्या को केन्द्र सरकार के पाले में धकेल कर, अपना पल्ला झाड़ा।

बैठक में शामिल चीनी उद्योग यू.पी. के प्रमुख सचिव राहुल भटनागर कहते है कि इस बारे में मंगलवार को बैठक प्रस्तावित है, जिसमें निर्णय होगा। उधर, मिल मालिकान से हुई बातचीत के मुताबिक पेराई आरंभ होने के बावजूद मिलों की तरफ किसानों का 2400 करोड़ रुपए बकाया खड़ा है। ऐसा पहली बार हुआ है कि किसानों का इतना भारी भरकम बकाया शेष है।

इससे चीनी उद्योग के नुक्सान का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। मिलों को पिछले वर्ष 3 हजार करोड़ रुपए नकद का घाटा हुआ जबकि इससे पहले वर्ष में यह घाटा 1 हजार करोड़ रुपए था। इसका कारण चीनी की हुई कम कीमत है। इसके अलावा पिछले तीन सीजन से बन रही सरप्लस चीनी इसकी प्रमुख वजह है। वहीं चालू सीजन में और अधिक सरप्लस चीनी होने की उम्मीद है।

चालू सीजन के अंत तक सरप्लस चीनी का स्टाक 100 लाख टन को पार कर जाएगा। इससे 30 हजार करोड़ रुपए की नकदी का प्रवाह थम जाएगा। मंदी के कारण चालू सीजन में कहीं अधिक घाटा होने का भय बना हुआ है, जो कि बदकिस्मती से फि र से देश में सर्वाधिक होगा। गन्ने की कीमत फि र से बकाया में चली जाएंगी। 

आयात नहीं बल्कि चीनी कोनिर्यात करने की आवश्यकता
चालू सीजन में चीनी का निर्यात अनुदान देकर करने की जरूरत है। भारत से चीनी का निर्यात बीते वर्ष 2006-07-08 की तरह, भारत सरकार को 30 लाख टन निर्यात के लक्ष्य को प्रोत्साहन देने की घोषणा करनी चाहिए। चीनी का आयात नहीं बल्कि निर्यात करने की जरूरत है क्योंकि सस्ती चीनी आयात करने से यह दुर्गति है।

आयात रोकने पर महंगी हुई चीनी से मात्र 50 रूपए का बोझ
आयात रोकने से यदि 10 रूपए किलों भी चीनी महंगी हुई, तो पूरे एक परिवार पर मात्र 50 रूपए माहवार का बोझ पड़ेगा। ध्यान रहे कि एक परिवार 5 किलो से ज्यादा का चीनी का इस्तेमाल नहीं करता, जबकि महंगी हुई चीनी से लाखो किसानों का भला होगा और यूपी के सबसे बड़े चीनी उद्योग को राहत मिलेगी।

Edited by:Rakesh Tyagi

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