न्यायाधीशों की समिति मुझे संदेह से देख रही है : इंटर्न

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Tuesday, November 26, 2013-12:25 AM

नई दिल्ली: उच्चचतम न्यायालय के हाल ही में सेवानिवृत्त हुए न्यायाधीश पर यौन शोषण का आरोप लगाने वाली कानून की इंटर्न महसूस करती है कि शीर्ष अदालत के 3 न्यायाधीशों के समक्ष पेशी के दौरान उसे ‘संदेह की नजरों’ से देखा जा रहा है।

यह इंटर्न कानून की पढ़ाई के दौरान इस न्यायाधीश के पास काम कर रही थी। इंटर्न का यह भी कहना है कि इसी वजह से यौन शोषण के आरोप का खुलासा करने में विलंब हुआ क्योंकि वह महसूस करती है कि भारतीय कानून महिलाओं के प्रति अपराध के मामलों की संवेदनशीलता से निबटने के लिये तैयार नहीं है।

वैबसाइट ‘लीगली इंडिया’ ने वाल स्ट्रीट जर्नल में इस इंटर्न के प्रकाशित इंटरव्यू के हवाले से कहा कि उसे यह समझने और परिस्थिति से समझौता करने में वक्त लगा कि उसका यौन शोषण हुआ है।

इंटर्न के अनुसार, ‘अंतत: मैंने यह किया। मैं तो सिर्फ अपने अवचेतन मस्तिष्क से उस घटना को भुलाना चाहती थी। यह वही व्यक्ति था जिसकी मैं प्रशंसक थी और उससे कुछ और अपेक्षा करती थी।

निश्चित ही मैंने कानूनी रास्ता अपनाने के विचार पर सोचा लेकिन इससे भलाई होने की बजाय अधिक नुक्सान होने का भय था। पहली बात तो यह कि मेरा मामला कई सालों तक ङ्क्षखचता और दूसरा बचाव पक्ष के वकील अदालत में बार-बार उन क्षणों की याद दिलाते। मैं इस सबको भूलना चाहती थी।


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