‘नीतीश ने नहीं लिया गुजरात दंगों के बाद कोई धर्मनिरपेक्ष स्टैंड’

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Wednesday, November 27, 2013-11:25 AM

नई दिल्ली: लोक जनशक्ति पार्टी के प्रमुख रामविलास पासवान ने कहा कि अगले साल आम चुनाव के बाद अगर तीसरे मोर्चे को उभरना है, तो उसे कांग्रेस या भाजपा में से किसी एक का समर्थन जरूरी है। पासवान ने कहा, ‘‘देखिये, कांग्रेस या भाजपा के समर्थन के बिना तीसरा मोर्चा संभव नहीं है। उनका समर्थन अनिवार्य है । चूंकि गठबंधन को धर्मनिरपेक्ष रहना है तो वह भाजपा का समर्थन तो नहीं ले सकती, उसे कांग्रेस का समर्थन लेना होगा । इसलिए मैंने कहा है कि मुख्य मुद्दा कांग्रेस है और लोजपा कांग्रेस के साथ गठबंधन बनाये रखना चाहती है।’’ चारा घोटाला के सिलसिले में राजद प्रमुख लालू प्रसाद के जेल में रहने के बीच पासवान ने कहा कि 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले भविष्य की रणनीति तय करने के लिए मौजूदा घटक दलों के बीच गंभीर विचार विमर्श की जरूरत है।

पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने ‘प्रेस ट्रस्ट’ को दिये एक इंटरव्यू में कहा कि लोजपा कांग्रेस के साथ गठबंधन बनाये रखना चाहती है लेकिन अपने सहयोगियों के बारे में फैसला करने का दायित्व कांग्रेस पर है। उन्होंने कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि कांग्रेस के साथ हमारा गठबंधन बना रहे लेकिन गठबंधन के भविष्य की रणनीति के बारे में उन्हें तय करना है। फिलहाल हम राजद के साथ हैं लेकिन अब चूंकि लालू जी जेल में हैं और चुनाव नजदीक आ रहा है तो इसलिए दलों के बीच गंभीर विचार विमर्श की जरूरत है।’’ यह पूछे जाने पर कि भाजपा या कांग्रेस के साथ गठबंधन के बारे में लोजपा का अगला कदम क्या हो सकता है, पासवान ने कहा, ‘‘हम एक साथ बैठेंगे और मुद्दे पर चर्चा करेंगे। हम देखेंगे कि कांग्रेस का क्या रुख रहता है, लेकिन कांग्रेस और हमारा पुराना गठबंधन रहा है हम इसे खोना नहीं चाहते। हम पहले कांग्रेस से बात करेंगे और उनका रुख देखेंगे और उसके बाद ही अपनी रणनीति तय करेंगे।’’

हालांकि उन्होंने साथ ही यह स्पष्ट किया कि चुनाव बाद उनका समर्थन सिर्फ धर्मनिरपेक्ष ताकतों को रहेगा। एक समय भाजपा नेतृत्व वाले राजग गठबंधन में शामिल रहे पासवान ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी निशाना साधा और कहा कि 2002 के गुजरात दंगों के बाद उन्होंने कोई धर्मनिरपेक्ष स्टैंड नहीं लिया। उन्होंने कहा, ‘‘नीतीश कुमार आज तीसमार खां बन रहे हैं लेकिन हम दोनों 2002 में मंत्री थे। गुजरात मुद्दे पर मैंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था उन्होंने तब इस्तीफा क्यों नहीं दिया था ।’’ राज्यसभा सदस्य 67 वर्षीय पासवान ने बसपा प्रमुख मायावती पर अवसरवादी होने का आरोप लगाया। उल्लेखनीय है कि लोजपा का अभी लोकसभा में कोई प्रतिनिधि नहीं है। पासवान खुद 2009 का आम चुनाव हार गये थे।
 


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