कोयला घोटाला: उच्चतम न्यायालय के प्रस्ताव का किया विरोध

  • कोयला घोटाला: उच्चतम न्यायालय के प्रस्ताव का किया विरोध
You Are HereNational
Tuesday, November 26, 2013-6:46 PM

नई दिल्ली: कोयला खदान आबंटन घोटाला कांड में केन्द्रीय जांच ब्यूरो की मोटी मोटी जांच रिपोर्टों का अवलोकन करके न्यायाधीशों को इसकी खामियों की जानकारी देने के लिए न्याय मित्र नियुक्त करने के प्रस्ताव का जांच एजेन्सी ने आज उच्चतम न्यायालय में पुरजोर विरोध किया। जांच ब्यूरो का तर्क है कि यह उसकी स्वतंत्रता के साथ समझौता होगा।

न्यायमूर्ति आर एम लोढा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष सुनवाई शुरू होते ही जांच एजेन्सी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेन्द्र शरण ने न्याय मित्र नियुक्त करने के न्यायाधीशों के प्रस्ताव का जोरदार विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह उसे स्वीकार्य नहीं है क्योंकि यह उसकी जांच की निगरानी जैसा होगा। 

शरण ने कहा, ‘‘इससे इस मामले की जांच में हस्तक्षेप होना निश्चित है। यदि जांच रिपोर्ट न्याय मित्र के साथ साझा की गयी तो यह इस संस्था की स्वतंत्रता के साथ समझौता होगा। रिपोर्ट न्यायालय के लिये है और किसी अन्य व्यक्ति को इसके अवलोकन की अनुमति नहीं दी जायेगी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘न्यायमित्र मुझे स्वीकार्य नहीं है।’’ न्यायाधीशों ने कहा कि जांच की निगरानी करने का सवाल ही नहीं है और वह तो सिर्फ तफतीश की निगरानी ही कर रहे हैं।

न्याय मित्र की नियुक्ति के विचार के खिलाफ सीबीआई के इस रूख पर आश्चर्य व्यक्त करते हुये न्यायाधीशों ने कहा, ‘‘यह समझना मुश्किल हो रहा है कि न्याय मित्र की नियुक्ति से जांच किस तरह प्रभावित होगी। यदि न्यायालय को एक आपसे इतर न्यायमित्र के तथ्यपरक दृष्टिकोण का लाभ मिलता है तो इसमें समस्या क्या है। आप इन रिपोर्ट के अवलोकन में हमें हो रही परेशानियों को महसूस नहीं कर रहे हैं और न्याय मित्र हमें यह बता सकते हैं कि इसमें क्या कमी है।’’


विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You