परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर साबित हुआ अपराध

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Tuesday, November 26, 2013-7:40 PM

नई दिल्ली (मनीषा खत्री): आरुषि की हत्या उसके मम्मी-पापा ने ही की थी। लगभग साढ़े 5 साल बाद आखिरकार देश की सबसे बड़ी मिस्ट्री बने आरुषि-हेमराज हत्या मामले में कल गाजियाबाद की विशेष सी.बी.आई. अदालत ने आरुषि के माता-पिता को ही दोषी करार दिया।

आरुषि-हेमराज हत्या मामला घटना के समय देश की सबसे बड़ी मिस्ट्री बन गया था। परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर सी.बी.आई अपने केस को साबित करने में कामयाब रही। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह था कि एक घर में चार आदमी सो रहे थे।

 इनमें से दो की मौत हो गई और दो जिंदा बच गए। घर में जबरन कोई नहीं आया और न ही घर से बाहर कोई गया। तो फिर किसने उन दोनों को मारा। सी.बी.आई ने इसी सवाल को आधार बनाते हुए यह साबित कर दिया कि तलवार दंपति ने ही आरुषि व हेमराज की हत्या की थी।

तलवार दंपत्ति ने खुद ही यह बयान दिया था कि घटना की रात घर में चार आदमी थी। उनका यह बयान ही उनके गले की हड्डी बन गया। वहीं इसी फैसले के साथ नोएडा पुलिस की वह थ्योरी साबित हो गई कि तलवार दंपत्ति ने ही दोनों को मारा है। अगर उसी समय ढंग से जांच होती तो शुरूआत में ही तलवार दंपति पर शिकंजा कस जाता।

लचर जांच के आधार पर बढ़ा केस:
पूर्व आई.पी.एस उदय सहाय का कहना है कि इस केस में किसी भी जांच एजेंसी ने सही तरीके से अपना काम नहीं किया। उत्तर प्रदेश पुलिस ने लापरवाही बरतने के साथ सबूतों को इकट्ठा करने में भी लापरवाही दिखााई। उत्तर प्रदेश पुलिस ने जांच में अधिकतर काम डॉ. नूपुर व राजेश तलवार के कहने पर किया।

इसमे कोई दो राय नहीं कि पुलिस तलवार दंपत्ति के प्रभाव में थी जिसने जांच का गोल्डेन टाइम गंवा दिया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को जब लगा कि जांच आरुषि के माता-पिता के अनुसार हो रही है तब जाकर उन्होंने एक्शन लेना शुरू किया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।

आखिर क्या वजह थी कि तलवार दम्पति ने कह दिया कि नौकर हेमराज फरार है तो उसी उन्हीं की थ्योरी को मान गई। उसी दिन पुलिस ने छत पर जाकर जांच क्यों नहीं की। बाद में जांच जब सी.बी.आई. के पास पहुंची तो वह लोकल पुलिस की जांच के रास्ते पर नहीं चलना चाहती थी।

कोर्ट ने अधिकार का प्रयोग किया:
पूर्व सी.बी.आई. निदेशक जोगिंदर सिंह का कहना है कि कोर्ट ने अपने अधिकार का इस्तेमाल कर क्लोजर रिपोर्ट को चार्जशीट माना है। उसी के आधार पर सी.बी.आई. कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है, लेकिन इसे अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता है।

तलवार दंपत्ति के पास अभी हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में जाने के रास्ते खुले हुए हैं। उन्होंने ऊपरी कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की बात भी कही है। चाहे वह उत्तर प्रदेश पुलिस हो या सी.बी.आई. की जांच टीम, जांच में पूरी लापरवाही बरती गई।

कितनी हैरानी की बात है कि एक घर में चार लोग सोए रहते हैं, उसमे से दो की हत्या किए जाने के साथ एक का शव छत तक पहुंचाया जाता और दूसरे के शव को सुरक्षित रखा जाता है। लेकिन घर के बाकी दो लोगों के साथ कुछ होना तो दूर उनकी नींद तक नहीं खुलती है।


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