आरुषि हत्याकांड: ‘शुरू से ही खामियों से भरी रही जांच’

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Tuesday, November 26, 2013-7:52 PM

नई दिल्ली: दिल्ली के पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश एस.पी. सिंह चौधरी का कहना है कि आरुषि हत्याकांड मामले की जांच शुरू से ही विरोधाभासी रही है। कहने के लिए तो ये कहा जा रहा है कि ये मामला साढ़े पांच साल पुराना है। अगर हम सही तरीके से देखें तो ये केस सुनवाई में केवल दो साल ही रही जबकि साढ़े तीन साल तक तो विभिन्न एजैंसियां इस पर जांच ही करती रही।

पहले यूपी की नोएडा पुलिस ने इसकी जांच की जिसमें जब उल्टे सीधे आरोप लगने लगे तो वहां की सरकार ने इसे अपनी जान बचाने के लिए सीबीआई के हवाले कर दिया। इसके अलावा सीबीआई ने भी इस मामले की विवेचना सही नहीं की।
 
शुरू में यूपी पुलिस ने तलवार दंपति को शक के दायरे में लिया था और नौकरों को भी गिरफ्तार किया था लेकिन बाद में सीबीआई ने जब अपनी क्लोजर रिपोर्ट लगाई तो उसका ये कहना था कि जिन लोगों पर भी शक है उनके खिलाफ केस चलाए जाने के लायक सुबूत नहीं थे। यही नहीं पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर का बयान भी विरोधाभासी रहा।

पहले उन्होंने जांच में ये कह दिया था कि निजी अंगों की जांच नहीं की थी लेकिन बाद में जब सीबीआई ने दोबारा उन्हें बुलाया तो न जाने उन्होंने क्या-क्या कह दिया। एस पी सिंह चौधरी ने आशंका भी जताई कि बहुत संभव है कि इस मामले पर सीबीआई कोर्ट के फैसले को अदालत खारिज ही कर दे। जिस तरह से ये मामला हैंडल किया गया है उस लिहाज से ये बहुत ही कमजोर केस है।

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