एक नहीं कई बार चूकी सी.बी.आई.

  • एक नहीं कई बार चूकी सी.बी.आई.
You Are HereNational
Tuesday, November 26, 2013-8:07 PM

नई दिल्ली (हर्ष कुमार सिंह): आरुषि-हेमराज मर्डर केस में कोर्ट ने तलवार दंपति को दोषी करार दे दिया है। ये संभावित था और तमाम हालात चुगली कर रहे थे कि इस हत्याकांड में आरोपी कोई भी हो लेकिन तलवार दंपति के सहयोग के बिना ये हत्याकांड संभव नहीं था।

यहां सबसे बड़ा सवाल ये खड़ा होता है कि सी.बी.आई. ने किस आधार पर दिसम्बर 2010 में अपनी क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर इस केस को बंद कर दिया था? और अगर तलवार दंपति ने ही ये कांड अंजाम दिया था तो फिर उन्होंने इस केस को दोबारा क्यों खुलवाया?

सी.बी.आई. कोर्ट ने तलवार को अपने गवाह क्यों पेश नहीं करने दिए? ये कुछ सवाल ऐसे हैं जो केस पर कोर्ट का ेेेफैसला आ जाने के बाद भी अबूझ हैं।

वारदात की रात और हालात:
24 मई 2008 क ो आरुषि तलवार (13) का जन्मदिन था और 18 मई को आरुषि अपने दोस्तों को एक पार्टी देने वाली थी। इसके लिए एक पार्टी हॉल भी बुक कर दिया गया था। 15 मई की शाम को डॉ. राजेश तलवार ने आरुषि को जन्मदिन के उपहार के रूप में एक कैमरा भी गिफ्ट किया था।

दिल्ली पब्लिक स्कूल, नोएडा में कक्षा 9 में पढ़ रही आरुषि इस कैमरे को लेकर काफी उत्साहित थी। उसने इस कैमरे से कुछ अपनी और माता-पिता की भी तस्वीरें खींची थी। इन तस्वीरों में नजर आने वाली दीवार घड़ी ये दिखाती है कि 10 बजकर 10 मिनट तक सब कुछ ठीक-ठाक था। जो भी हुआ इसके बाद ही हुआ। 16 की सुबह खून से लथपथ आरुषि की लाश कमरे से मिली। उसके सिर पर चोट मारी गई थी और गर्दन भी तराश दी गई थी।

पुलिस को प्रथम दृष्टया इस कांड का शक घर के 45 वर्षीय नौकर हेमराज पर शक आया। हेमराज गायब था, लेकिन पुलिस उस समय भौचक्क रह गई जब 17 मई को उसकी लाश भी घर की छत पर मिल गई। अब पुलिस पर इस मामले में डॉ. राजेश तलवार और उनकी बीवी नूपुर तलवार पर शक करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था। इसके बाद शुरू हुआ देश के इस सबसे बड़ी रहस्यमयी मामले का कोर्ट व मीडिया ट्रायल को दौर।

शक के दायरे में आए तलवार दंपति:
5 साल के दौरान इस मामले को लेकर जितने भी अंदाजे और अटकलें लगाई जा सकती थीं वे लगाई गई। हर व्यक्ति इस मामले में एक के बाद एक गुत्थी सुलझ जाने की बात कर रहा था लेकिन कोई भी ये समझ नहीं पा रहा था कि आखिर दोषी कौन था? पुलिस का मानना था कि तलवार दंपति ने आरुषि और हेमराज को आपत्तिजनक हालात में पकड़ लिया था। इसलिए उन्होंने पहले आरुषि को मार डाला और फिर सुबूत मिटाते हुए हेमराज को भी मार डाला।

 पुलिस के अनुसार, तलवार ने अपनी गोल्फ स्टिक से आरुषि के सिर पर वार किया और फिर सर्जरी में काम आने वाले किसी औजार से उसकी गर्दन काट डाली। पुलिस का कहना था कि डॉ. तलवार ने छत पर जाने वाला रास्ता खोलने में हिचकिचाहट दिखाई थी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी हस्तक्षेप किया था। हेमराज की लाश को शायद ठिकाने लगाने की योजना उनकी थी जो कामयाब नहीं हो सकी।

हालांकि जिस हालत में हेमराज का शव छत पर पड़ा मिला था तो उससे लग रहा था कि उसकी हत्या कैसे की गई इसे भी छिपाने का प्रयास किया गया था।

3 अन्य कर्मचारी भी थे निशाने पर :
हेमराज का शव मिलने के बाद शक की सुई तीन अन्य घरेलू कर्मचारियों की ओर भी घूमी थी। ये सब भी उसी इलाके में रहते थे जिसमें तलवार का घर था। इनमेें से एक कृष्णा, डॉ. तलवार का क्लीनिक सहायक था। दूसरा विजय मंडल था जो पड़ोस में ही काम करता था। तीसरा था राजकुमार, जो तलवार के मित्र डॉ. प्रफुल्ल और अनिता दुर्रानी का नौकर था। इन तीनों को भी पुलिस ने जांच के दायरे में लिया।

इस दौरान तलवार दंपति और तीनों नौकरों को दो-दो बार पोलीग्राफ, ब्रेन मैपिंग, लाई डिटैक्टर टैस्ट और नार्को एनेलेसिस से गुजरना पड़ा। हालांकि इन सभी परीक्षणों में तलवार दंपति को क्लीन चिट मिली जबकि कृष्णा और राजकुमार के टैस्ट संदिग्ध रहे और लग रहा था कि उनकी भूमिका इस हत्याकांड में रही थी। उन्होंने हत्या की रात घर में मौजूदगी भी स्वीकार की थी। सी.बी.आई. की जांच टीम के हैड अरुण कुमार ने 11 जुलाई 2008 को प्रैस कांफ्रैंस में इन सब ङ्क्षबदुओं को रखा भी था।


विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You