नार्को टैस्ट को भी नहीं सुलझा सकी सी.बी.आई.

  • नार्को टैस्ट को भी नहीं सुलझा सकी सी.बी.आई.
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Tuesday, November 26, 2013-8:43 PM

नई दिल्ली: आरुषि कांड मामले में नार्को टैस्ट जांच के लिहाज से एक बड़ा ब्रेकथ्रु था। हालांकि ये बात और है कि नार्को टैस्ट को कोर्ट किसी खास सुबूत के तौर पर नहीं देखती है, लेकिन इसके संकेत जरूर विचार में लाए जा सकते थे। तब जबकि केस एक दिशा की ओर बढ़ रहा था तो सी.बी.आई. ने इस मामले को सुलझाने का ज्यादा प्रयास नहीं किया।

सितम्बर 2009 में जांच अधिकारी अरुण कुमार को इससे हटा दिया गया और जांच के लिए ए.जी.एल. कौल को नई टीम के साथ नियुक्त कर दिया गया। इसी के बाद से इस केस में चौंकाने वाले बदलाव आए। नई टीम ने पुराने सुबूतों पर गौर न करते हुए इस केस पर क्लोजर रिपार्ट लगाने का फैसला कर लिया।

 दिसंबर 2010 में सी.बी.आई. ने इस केस में क्लोजर रिपोर्ट लगाते हुए कहा कि इस केस में सुबूतों का अभाव है, हत्या के पीछे का मकसद अस्पष्ट था ौर घटनाक्रम में कई प्रकार के अंतराल थे जो किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंचने दे रहे थे। ऐसे में सी.बी.आई. ने इसमें क्लोजर रिपोर्ट लगाने का फैसला किया। हालांकि दो ऐसे ङ्क्षबदु थे जिन पर सी.बी.आई. आगे बढ़ सकती थी।

पहला तो ये कि तलवार दंपति को ही आरोपी मानकर जांच आगे बढ़ाई जाती, या फिर कृष्णा व राजकुमार को शक के दायरे में लेकर सी.बी.आई. इस केस को नतीजे तक ले जा सकती थी।

समय बर्बाद करना चाहते थे तलवार:
इस मामले में स्पैशल सी.बी.आई. कोर्ट में जो ट्रायल आगे चला उसे इस परिप्रेक्ष्य में भी काफी अहम माना जा सकता है कि सी.बी.आई. की उसी क्लोजर रिपोर्ट को आधार बनाया गया जिसमें ये पहले ही कह दिया गया था कि उनके पास पर्याप्त सुबूतों का अभाव है। सीबीआई ने 39 गवाह पेश किए। हालांकि तलवार दंपति भी 14 गवाह पेश करना चाहता था। इन गवाहों में सी.बी.आई. की पुरानी टीम के सदस्यों के अलावा नोएडा पुलिस के कुछ अधिकारियों की भी गवाही कराने की बात कही गई थी। तलवार चाहते थे कि कोटई के सामने सही तस्वीर रखी जाए लेकिन कोर्ट ने उन्हें इजाजत नहीं दी।

कोर्ट का मानना था कि बिना वजह तलवार दंपति उनका समय खराब करना चाहते हैं। इलाहाबाद हाई कोर्ट में भी तलवार दंपति ने इसके लिए याचिका दायर की लेकिन वहां से भी उन्हें निराशा ही मिली। वे सुप्रीम कोर्ट तक गए लेकिन वहां भी उन्हें नाउम्मीदी ही मिली। अभियोजन पक्ष के वकील आर के सैनी ने स्पैशल अदालत से कहा कि वे बिना वजह समय बर्बाद करना चाहते हैं। सी.बी.आई. ने कहा कि अगर तलवार दो हजार गवाह पेश करने की इजाजत मांगेंगे तो क्या उनको दे दी जाएगी?

सी.बी.आई. ने ये भी स्वीकार किया था कि उनके पास सुबूतों का अभाव था लेकिन अगर कोर्ट इसमें दोबारा ट्रायल चाहती है तो कौन इनकार कर सकता है? इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर तलवार को चेताया भी था कि अगर वह ट्रायल के दौरान बार-बार उनके पास आएंगी तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। यानी तलवार दंपति के लिए दरवाजे हर ओर से बंद हो चुके थे।

बचने की पूरी उम्मीद थी तलवार को:
सी.बी.आई. के ऐसा कदम उठा लेने के बाद तलवार दंपति ने एक कदम आगे जाते हुए इस केस की जांच फिर से कराने की मांग की। तलवार दंपति अपरिपक्व क्लीन चिट नहीं चाहते थे। ये बात इसलिए भी चौंकाने वाली थी क्योंकि तलवार दंपति को खुद ही इस मामले का मुख्य दोषी माना जा रहा था। एक बड़ा सवाल ये उठता है कि क्या कभी दोषी बंद हो चुके केस की जांच को दोबारा खोलने की मांग कर सकता है?

अब जबकि तलवार दंपति को दोषी ठहरा दिया गया है तो ये बात भी मायने रखती है कि क्या तलवार दंपति ने खुद ही अपनी जान मुसीबत में डाली या फिर उन्हें ये गलतफहमी रही कि इस जांच में  सी.बी.आई. कृष्णा और राजकुमार की ओर ही बढ़ेगी और वे बच जाएंगे। पर ऐसा नहीं हुआ और परिणाम सामने है कि तलवार दंपति को दोषी ठहरा दिया गया।


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