अपराध के अनुसार उचित सजा देना हर कोर्ट की ड्यूटी

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Tuesday, November 26, 2013-11:00 PM

नई दिल्ली (मनीषा खत्री): आरुषि-हेमराज हत्या मामले में तलवार दम्पति को उम्रकैद की सजा देते हुए कहा कि अपराध के अनुसार उचित सजा देना हर कोर्ट की ड्यूटी है। अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो कोर्ट अपनी ड्यूटी निभाने में नाकाम साबित होगी।

गाजियाबाद कोर्ट स्थित विशेष सी.बी.आई. जज ने ऊपरी अदालतों के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी अपराध के लिए ऐसी सजा दिया जाना जरूरी है जो उसी तरह का अपराध करने वाले अन्य लोगों के लिए भी एक संदेश बन सकें।

अदालत ने कहा कि थॉमस रीड पावेल ने एक बार कहा था कि जज भी सामाजिक नीतियों को उसी तरह देखते हैं,जैसे हम और आप। उनके भी हाथ-पैर, अंग व भावनाएं होती है। वह उसी वातावरण में रहते हैं जिस में आम आदमी रहता है। ऐसे में उसी में रहते हुए उनको उचित फैसले देने होते हैं।

किसी अपराधी को फांसी की सजा तभी दी जाती है,जब यह साबित हो जाए कि वह समाज के लिए खतरा है। ऐसे में आर.आर. टैस्ट पर सभी तथ्यों को तोला जाता है। इस मामले के तमाम तथ्यों को देखने के बाद यह साबित होता है कि मामला दुर्लभ मामलों की श्रेणी में नहीं आता है। इसलिए तलवार दंपत्ति को उम्रकैद की सजा दी जाती है।

फांसी की सजा की मांग:
मंगलवार को कुछ लोगों ने तलवार दंपत्ति को फांसी की सजा दिए जाने की मांग करते हुए अदालत के बाहर प्रदर्शन किया और कहा कि आरुषि को न्याय दिया जाए।

वहीं एक बुजुर्ग व्यक्ति काफी देर तक कोर्ट-रूम की इमारत के बाहर जुटे मीडिया की भीड़ के बीच बैठा रहा और कहता रहा कि तलवार को फांसी दी जाए।


 

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