शंकररमन हत्याकांड: शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती समेत सभी आरोपी बरी

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Wednesday, November 27, 2013-3:47 PM

पुड्डुचेरी: पुड्डुचेरी की एक अदालत ने शंकर रमन हत्याकांड मामले में कांचि कामकोटि पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती समेत सभी 23 आरोपियों को आज बरी कर दिया।

अदालत ने फैसले में कहा कि हत्या का उद्देश्य साबित न/न हो पाने के कारण आरोपियों को दोषी नहीं माना जा सकता। सुनवाई के दौरान मामले के 189 में 80 गवाह अपने बयानों से मुकर गए थे। इनमें से अधिकतर प्रत्यक्षदर्शी थे। जयेंद्र सरस्वती पर वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाने वाले कांचि कामकोटि पीठ के प्रबंधक शंकर रमन कीवर्ष 2004 में हत्या कर दी गई थी।

 

शंकररमन हत्या मामले का घटनाक्रम
3 सितंबर 2004- कांचीपुरम के वरदराजपेरमल मंदिर के प्रबंधक शंकररमन की धारदार हथियार से वार करके हत्या की गई।

11 नवंबर 2004- इस हत्या के मामले में कांची शंकर मठ के शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती को आंध्रप्रदेश के महबूबनगर से दिवाली के दिन गिरफ्तार किया गया।

12 नवंबर 2004- जयेंद्र सरस्वती को न्यायिक हिरासत में भेजा गया।

10 जनवरी 2005- उच्चतम न्यायालय ने जयेंद्र सरस्वती की जमानत मंजूर की। इस मामले में कनिष्ठ पुजारी विजयेंद्र सरस्वती को गिरफ्तार किया गया।

21 जनवरी 2005- तमिलनाडु पुलिस के विशेष जांच दल ने आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया। सरकारी गवाह बनने वाले सिविल ठेकेदार रवि सुब्रमण्यम पर आरोप नहीं लगाया गया।

10 फरवरी 2005- मद्रास उच्च न्यायालय ने विजयेंद्र सरस्वती की जमानत मंजूर की।

7 मार्च 2005- मद्रास उच्च न्यायालय ने सुब्रमण्यम को धमकाने के आरोपी वरिष्ठ पुजारी की जमानत मंजूर की।

6 मई 2005 -  उच्चतम न्यायालय ने मामले को राज्य के बाहर स्थानांतरित करने की जयेंद्र सरस्वती की याचिका के संबंध में तमिलनाडु सरकार को नोटिस जारी किया।

 26 अक्तूबर 2005 - उच्चतम न्यायालय ने शंकररमन हत्या मामले की सुनवाई पुडुचेरी की एक अदालत में स्थानांतरित की।

28 मार्च, 2006- 24 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए।

2 अप्रैल, 2009- पुडुचेरी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय में सुनवाई शुरू हुई।

21 जनवरी, 2010- रवि सुब्रमण्यम पुडुचेरी अदालत में अपने बयान से मुकर गए।

21 मार्च 2010 - शंकररमन हत्याकांड में एक आरोपी कथिरावन की चेन्नई में हत्या हो गई। आरोपियों की संख्या कम होकर 23 हुई।

12 नवंबर, 2013 - प्रधान सत्र न्यायालय ने कहा कि वह 27 नवंबर को फैसला सुनाएगा।

27 नवंबर 2013- अभियोजन के आरोप साबित नहीं कर पाने पर शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती एवं उनके कनिष्ठ विजयेन्द्र सरस्वती और सभी आरोपियों को आरोपों से बरी कर दिया गया।


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