जो बिना पीए नहीं रह सकते पीएं: नीतीश

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Wednesday, November 27, 2013-2:37 PM

पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जीविका अन्तर्गत स्वयं सहायता समूह द्वारा शराब मुक्ति के लिए चलाये जा रहे जन जागरूकता अभियान की प्रशंसा करते हुये घोषणा की कि अगर ये स्वयं सहायता समूह किसी ग्राम को शराब मुक्त कराने में सफल होते हैं तो उसके ग्राम संगठन को पुरस्कार के रूप में एक लाख रूपये की राशि दी जायेगी। मद्य निषेद्य दिवस पर यहां आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने जीविका अन्तर्गत स्वयं सहायता समूह द्वारा शराब मुक्ति के लिए चलाये जा रहे जन जागरूकता अभियान की प्रशंसा की। उन्होंने घोषणा की कि अगर ये स्वयं सहायता समूह किसी ग्राम को शराब मुक्त कराने में सफल होते हैं तो उसके ग्राम संगठन को पुरस्कार के रूप में एक लाख रूपये की राशि दी जायेगी।

नीतीश कुमार ने कहा कि शराब बुरी चीज है इससे लड़ें। आदमी जो कमाता है पीने में गंवा देता है। यह परिवार को तोड़ता है। बच्चे बिलखते हैं। झेलना घर चलाने वाली औरतों को पड़ता है। पैसा, भोजन, शिक्षा और जीवन स्तर सुधारने में लगना चाहिए। हां, जो बिना पीए नहीं रह सकते पीएं। पीने के लिए ज्यादा पैसा दें। डूबे रहें। शराब की कीमत बढ़ाकर हम गरीबों की पहुंच से बाहर करना चाहते हैं। उन्होंने जीविका की स्वयं सहायता समूह द्वारा सामाजिक उत्थान की दिशा में किये जा रहे कार्यों की प्रशंसा करते हुये उन्हें बढ़-चढ़कर शराब मुक्ति की दिशा में कार्रवाई करने तथा आमलोगों के बीच इसके दुष्परिणाम का प्रचार-प्रसार करने हेतु प्रयत्नशील रहने का आह्वान किया।

 मुख्यमंत्री ने कहा कि जीविका अन्तर्गत महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा किये जा रहे कार्य सामाजिक परिवर्तन की दिशा में मूक क्रांति है एवं इसे साकार रूप देने के लिए सरकार हरसंभव सहयोग देने तैयार है। नीतीश कुमार ने बताया कि उन्होंने 26 नवम्बर 2010 को दूसरी बार सरकार का गठन कर कार्यभार संभाला एवं उसी दिन मद्य निषेध के संकल्प को साकार करने के उद्देश्य से 26 नवम्बर को मद्य निषेध दिवस के रूप में घोषित करते हुये सम्पूर्ण राज्य में शराब के विरूद्घ जन जागरूकता पैदा करने का प्रयास शुरू किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस दिवस के अवसर पर आयोजित किये जाने वाले प्रतियोगिताओं में स्कूल एवं कॉलेज के छात्र-छात्राओं द्वारा बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया जाना इस बात का द्योतक है कि वे सभी शराब के दुष्परिणाम से परिचित  है एवं मद्य निषेध के प्रति जागरूक है।

 मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2005 में जहॉ उत्पाद विभाग का राजस्व मात्र 319 करोड़ रूपये था, वहीं 2012-13 में यह बढ़कर 2431 करोड़ रूपये हो गया, जबकि 2013-14 में विभाग द्वारा 3200 करोड़ का राजस्व अर्जन का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि राजस्व की वृद्घि इस बात का द्योतक नहीं है कि शराब पीने वाले लोगों की संख्या में वृद्घि हो गई है बल्कि यह नीतियों को दुरूस्त करने एवं कर की चोरी करने वालों के विरूद्घ सतत् अभियान का प्रतिफल है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक लोगों को नशाखोरी से मुक्त कराना। इसके लिए जहां एक ओर जन जागरूकता फैलाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर शराब को महंगा करते हुये इसे आम गरीब नागरिकों से दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि विगत तीन वर्षों में शराब की दुकानों की संख्या में वृद्घि नहीं की गई है। परचुनियों द्वारा गांव-गांव घूमकर पाउच बेचने की शिकायत के संबंध में मुख्यमंत्री ने उत्पाद विभाग के कर्मियों को निर्देश दिया कि इनलोगों पर कठोर कार्रवाई की जाये। उन्होंने बताया कि अगले वर्ष से देशी शराब प्लास्टिक की बोतलों में बिकेगी एवं पाउच पर पूर्ण रूप से रोक लगा दिया जायेगा। इससे जहॉ एक ओर मिलावट की संभावना को निर्मूल किया जा सकेगा, वहीं दूसरी ओर इसकी गैर कानूनी बिक्री पर रोक लगायी जा सकेगी।
 


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